जालंधर| दोआबा कॉलेज की दिशा कमेटी की ओर से महर्षि दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय “महर्षि दयानंद सरस्वती और भारतीय मूल्य प्रणाली का पुनरुद्धार” रहा, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुखविंदर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप भंडारी ने अपने संबोधन में महर्षि दयानंद के विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी जी ने आडम्बरों में जकड़े और विभाजित समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार तथा ‘स्वराज’ का नारा बुलंद कर समाज में जागृति लाने में महर्षि जी के अमूल्य योगदान को याद किया। मुख्य वक्ता प्रो. सुखविंदर सिंह ने स्वामी दयानंद के जीवन और विचारों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने पाश्चात्य प्रभाव के दौर में भारतीय संस्कृति और वैदिक मूल्यों को पुनर्स्थापित किया। गुलामी के समय में उन्होंने भारत की आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक स्वतंत्रता की जोरदार वकालत की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आर्य समाज ने संस्कृत के साथ एंग्लो वैदिक शिक्षा को बढ़ावा दिया तथा स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल देकर नारी उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने प्रश्न रखे। इस अवसर पर डॉ. ओमिंदर जौहल, डॉ. सुरेश मागो सहित अन्य स्टाफ सदस्य भी उपस्थित रहे।


