तब्लिगी इज्तिमा के लिए 800 बीघा में बसाया नया शहर:2 लाख लोगों के लिए टैंट-अस्थायी हॉस्पिटल समेत कई व्यवस्थाएं; 6150 वॉलंटियर तैनात

झुंझुनू शहर में प्रदेश स्तरीय दीनी तब्लीगी इज्तिमा (प्रदेश स्तरीय इस्लामिक सम्मेलन) चल रहा है। रविवार को इसका दूसरा दिन है। सोमवार को दुआ के बाद यह समाप्त होगा। आयोजन के लिए शहर में मलसीसर रोड पर 800 बीघा में नया टैंट शहर बसाया गया है। यहां एक साथ 2 लाख लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से 60 हजार लोगों के लिए परमिशन दी गई है। इसमें पंडाल, पार्किंग, अस्थायी आवास-हॉस्पिटल, फूड जोन, वुजू खाना, वॉशरूम आदि बनाए गए हैं। दीनी तब्लीगी इज्तेमा में अनुशासन का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है। 6150 वॉलंटियर्स संभाल रहे सभी व्यवस्थाएं खास बात ये है कि पुलिस प्रशासन की मदद के बिना बड़ी भीड़ को कंट्रोल करने का जिम्मा 6150 कार्यकर्ताओं के पास है। ट्रैफिक से लेकर लोगों के ठहरने-भोजन की व्यवस्था भी ये वॉलंटियर्स खुद ही संभाल रहे हैं। झुंझुनूं में पहली बार प्रदेश स्तरीय इज्तिमा हो रहा है। इज्तिमा स्थल पर 175 स्टॉलें लगी हैं। 25 स्टॉल भोजन की तथा 150 स्टॉल चाय-नाश्ता, फ्रूट की हैं। 700 युवाओं के जिम्मे ट्रैफिक व्यवस्था इज्तिमा कमेटी ने 700 वॉलंटियर्स को सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए वॉलंटियर्स पार्किंग से लेकर डायवर्जन तक की व्यवस्था देख रहे हैं। इन्हें विशेष ड्रेस कोड व आईकार्ड दिए गए हैं। शहर के प्रमुख रास्तों पर दिन रात ये वॉलंटियर्स ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रहे हैं। शहर के पीपली चौक से लेकर मलसीसर रोड पर इज्तेमा स्थल तक हर जगह वॉलंटियर्स व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। इन्हें इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई थी। लाखों लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से कुछ पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। लेकिन सारी व्यवस्थाएं वॉलंटियर्स की ओर से होने के कारण पुलिस जवानों को विशेष प्रयास नहीं करने पड़े। 500 युवा स्वागत में लगे, इज्तिमा तक पहुंचाने का जिम्मा इन्हीं के पास प्रदेशभर से आ रहे लोगों को इज्तिमा तक पहुंचने की जिम्मेदारी 500 युवाओं के जिम्मे है। ये रेलवे स्टेशन, बस डिपो, प्राइवेट बस स्टैंड, गुढ़ा मोड़, मंडावा मोड़, सगीरा सर्किल, पीपली चौक, पीरु सिंह सर्किल, अहिंसा सर्किल, अग्रसेन सर्किल समेत प्रमुख चौराहों पर तैनात हैं। इनका काम आने वाले लोगों को वाहन मुहैया कराकर उन्हें इज्तेमा स्थल तक पहुंचाने में सहयोग करना है। यानी उनका स्वागत कर उनको रास्ता बता रहे हैं। इसके लिए जगह-जगह पॉइंट बनाए गए हैं। अस्थायी अस्पताल, यहां आईसीयू भी स्थापित इज्तिमा स्थल पर लोगों के आपातकालीन इलाज के इंतजाम भी किए गए हैं। इसके लिए अस्थायी अस्पताल बनाया गया है। यहां डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ की दिन-रात ड्यूटी लगाई है। आईसीयू बनाया गया है। निशुल्क उपचार, जांच व दवा की व्यवस्था की गई है। पांच मेडिकल पॉइंट बनाए गए हैं। एंबुलेंस को तैनात किया गया है। इज्तेमा में आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो इसके लिए इज्तेमा स्थल पर 175 स्टॉल लगी हैं। इनमें 25 स्टॉल भोजन की, 150 चाय नाश्ता, फ्रूट की हैं। पानी मुहैया कराने के लिए 50 टैंकर लगे हैं। बोतलबंद पेयजल भी लोगों को दिया जा रहा है। कार्यकर्ता वुजू के लिए जल व्यवस्था, ट्रैफिक, सफाई, चिकित्सा, पार्किंग, रजाई गद्दे, चाय-नाश्ता, पानी की सप्लाई के काम कर रहे हैं। उलेमाओं के बयान रविवार को फजर की नमाज के बाद उलेमाओं के बयान जारी हुए। उलेमाओं ने पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा सल्ललाहू अलैहि वसल्लम के बताए नेकी और सच्चाई के रास्ते पर चलने का लोगों से आह्वान किया। नमाज के फायदे, रोजा बुराइयों से रोकने में इंसानों की मदद करता है। जिंदगी में एक बार हज करना फर्ज है। समाज के गरीब और बेसहारा लोगों की मदद के लिए अपने माल (कमाई) में से जकात (दान) निकालना भी जरूरी है। इन सब मुद्दों पर बयान किए गए। उन्होंने कहा- दीन (धर्म) का काम जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह इबादत है। जो इंसान को अल्लाह के करीब ले जाती है। इस्लाम सिर्फ इबादत का मजहब नहीं, बल्कि यह इंसानी जिंदगी के हर पहलू को संभालने वाला मजहब है। मुसलमान अपने किरदार से इस्लाम का सच्चा संदेश दूसरों तक पहुंचाएं। मुसलमानों को हर समय अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अपने सभी कामों में उसकी रज़ा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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