भोपाल में विश्व मैत्री मंच का राष्ट्रीय सम्मेलन:साहित्यकारों ने कहा-समाज की संवेदना से जुड़कर होता है साहित्य का सृजन

भोपाल के होटल में रविवार को अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन और हेमंत स्मृति पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अलंकरण सत्र में मंच के राष्ट्रीय सम्मेलन के अध्यक्ष कैलाश चंद पंत ने सभी पुरस्कार विजेताओं को आशीर्वाद दिया। संस्था की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कवि अरुणाभ सौरभ की रचनाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कविताएं प्रकृति में ईश्वर की खोज करती हैं। मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने भोपाल को साहित्यकारों का मंदिर बताते हुए कहा कि यहां साहित्य सुगंध की तरह बहता है। उन्होंने अपनी एक कविता भी सुनाई- “सड़कों पर शीशे की किरचें हैं और नंगे पांव हमें चलना है।” मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक और वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. विकास दवे ने साहित्य सृजन के बारे में एक महत्वपूर्ण बात कही कि जब लेखक समाज की संवेदना को अपनी संवेदना से जोड़ता है, तभी वास्तविक साहित्य का निर्माण होता है। कार्यक्रम में साहित्य और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न हस्तियों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार (रामायण केंद्र के निदेशक) प्रो. राजेश श्रीवास्तव ने एक कविता “एक समंदर ढूंढ रहा हूं, मोती अंदर ढूंढ रहा हूं।” पढ़कर सुनाई। सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार विजय बहादुर सिंह ने कहा कि- “लेखक होना बहुत आसान भी है और बहुत कठिन भी। जो लोग समाज की चुनौतियों को समझते हैं, उनके लिए बहुत कठिन है। लेखक होने के लिए जरूरी है कि हम सोचें कि हमारे जमाने के लोग ही हमें क्यों नहीं पढ़ रहे हैं। साहित्य हमें आदमी से इंसान बनना सिखाता है। मनुष्य होकर जीने की कला सिखाता है। “अंजना श्रीवास्तव ने हेमंत की यादों को ताजा किया। अतिथियों का स्वागत जया केतकी (निदेशक अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच) ने किया। इस सत्र का संचालन एवं आभार मुजफ्फर इकबाल सिद्दिकी (महासचिव अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच) ने किया। द्वितीय सत्र-गद्य सत्र की अध्यक्षता इंडिया नेटबुक्स के डॉ. संजीव कुमार ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि तथा कथाकार, गोकुल सोनी, विशिष्ट अतिथि राजेंद्र गट्टानी , वरिष्ठ कवि एवं अध्यक्ष मध्य प्रदेश लेखक संघ मंचासीन थे। विशिष्ठ अतिथि थीं डॉ. रानी श्रीवास्तव। डॉ. राजेंद्र राजन एवं डॉ .विनीता राहुरिकार ने इस सत्र में जहां कहानी पाठ किया तो वहीं रामस्वरूप दीक्षित ने व्यंग्य पाठ किया। रानी सुमिता ने कार्यक्रम का संचालन किया।तृतीय सत्र लघुकथा का था। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं वनिका प्रकाशन की मालिक डॉ. नीरज शर्मा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में लघुकथा शोध केंद्र समिति की निदेशक कान्ता रॉय उपस्थित थीं। डॉ. क्षमा शक्ति पाण्डेय एवं डॉ. सुषमा सिंह इस सत्र में विशिष्ट अतिथि थीं। भारत के विभिन्न शहरों से आए 26 लघु कथाकारों ने रचना पाठ किया। समापन सत्र का संचालन करते हुए शेफालिका सक्सेना ने सभी प्रतिभागियों को प्रतीक चिन्ह वरिष्ठ रचनाकारों के हाथों प्रदान कराया। कार्यक्रम में टीकमगढ़, दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम, मुंबई, कानपुर, जोधपुर, लखनऊ, सीहोर, विदिशा, रायपुर, इंदौर उज्जैन से आए हुए साहित्यकारों सहित भोपाल के साहित्यकारों एवं पत्रकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

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