सत्संग में सुधांशु महाराज ने ब्रह्म मुहूर्त का महत्व बताया:महाराज बोले- सुबह 3:40 से शुरू होता है अमृत काल, इस समय की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है

जयपुर में रविवार को आयोजित दिव्य भक्ति सत्संग में विश्व जागृति मिशन के संस्थापक आचार्य सुधांशु महाराज ने ब्रह्म मुहूर्त के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुबह 3:40 बजे से शुरू होने वाला समय अमृत काल कहलाता है, जिसमें पूरे ब्रह्मांड में दैवीय शक्तियां सक्रिय होती हैं। माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के तक्षशिला ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में महाराज ने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में उषा काल में जागने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि इस समय जागकर की गई प्रार्थना और साधना से स्वास्थ्य, सफलता और प्रगति संबंधी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि अमृत वेला में प्रभु के चरणों से जुड़कर व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। सत्संग के दौरान उन्होंने भक्तों को गुरु और ईश्वरीय कृपा से जीवन में सफलता प्राप्त करने, आध्यात्मिक उन्नति और व्यक्तित्व विकास के मार्गदर्शन से भी अवगत कराया। जयपुर मंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और महाराज के विचारों से लाभान्वित हुए। सुधांशु महाराज ने कहा कि इस मायावी संसार से दूर रहकर अपने सनातन धर्म को जानने और समझने से ही आगे जीवन में सफलता मिलेगी। उन्होंने अपने भीतर सूरज को जगाने और सूर्योदय से पूर्व जागने की सलाह देते हुए कहा कि प्रतिदिन सूरज तुम्हें जगाने के लिए आए, उससे पहले ही जागृत हो जाने की आदत डालो। गुरुवर ने उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे संसार के सभी सफल लोगों में प्रात: कालीन वेला में जागने का एक गुण है, जब तक दूसरे लोग जागते है, वे अपने कई महत्वपूर्ण काम पूरे करके जीवन की दौड़ में बहुत आगे निकल जाते है। पूजा पद्धति की सरल व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान स्वयं अपने बच्चों को कहते है, सुनो मेरे अमृत पुत्रों और जब भक्त वैदिक तरीके से पूजा करते है तो ईश्वर से यह प्रार्थना करते है कि अमृत ही मेरा बिछौना है, और अमृत ही मुझे ओढ़ना है। विजामि प्रमुख ने कहा कि जीवन में अमृत उनके हिस्से में आता है, जिनके जीवन में अनुशासन है, चमकते वहीं है जो अपने आपको नियंत्रित करना जानते है और सफलता के शिखर पर लम्बे समय तक टिकेंगे वहीं जो मर्यादा में रहते है। उन्होंने वैदिक पूजा, ध्यान और साधना के तरीके बताते हुए ‘नित्योहं’, ‘अमृतम’, ‘शाश्वतं’, ‘निरंजनोहं’, ‘शुद्धोहं’ और ‘बुद्धोहं’ के बारे में सूक्ष्म चर्चा करते हुए जीवन में अमृत वचन और अमृत कर्म से हर क्षेत्र में अलौकिक आनंद और आध्यात्मिक प्रगति के गूढ़ रहस्य साझा किए। उन्होंने कहा कि हम अमृत प्राप्ति के लिए ही दुनिया में आए है, सभी को इसके लिए भरपूर चेष्टा करनी चाहिए। विश्व जागृति मिशन जयपुर मंडल के प्रधान मदन लाल अग्रवाल ने बताया कि तक्षशिला ऑडिटोरियम में एक दिवसीय भक्ति सत्संग में भारी संख्या में भक्तों और सत्संग प्रेमी महाराज द्वारा दिए जा रहे अमृत सन्देश को ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने गुरुदेव के सानिध्य में अगली बार जयपुर में चार दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का आयोजन करने के लिए सभी भक्तों को संकल्पित करते हुए यह जानकारी दी।

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