बजट घोषणा में संविदा पर लगे शिक्षकों को परमानेंट नहीं करने पर टीचर्स आक्रोशित हो गए। शुक्रवार को झुंझुनूं कलेक्ट्रेट के बाहर अखिल राजस्थान सहायक शिक्षक, कनिष्ठ शिक्षक, पंचायत शिक्षक संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कलेक्टर को सीएम के नाम का ज्ञापन सौंपा गया। शिक्षकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि यदि आगामी संशोधित बजट में उनके नियमितीकरण की घोषणा नहीं हुई, तो पूरे प्रदेश में चक्का जाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा। 30-35 वर्षों का अनुभव, फिर भी परमानेंट होने का इंतजार संघर्ष समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि सहायक शिक्षक, कनिष्ठ शिक्षक, पंचायत शिक्षक, शिक्षा सहायक, पाठशाला सहायक और विद्यालय सहायक पिछले 30 से 35 वर्षों से शिक्षा विभाग में लगे है। ये कार्मिक तृतीय श्रेणी शिक्षक के समकक्ष कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज भी इन्हें बहुत कम मानदेय पर संविदा पर ही रखा गया है। ज्ञापन के माध्यम से समिति ने आक्रोश व्यक्त किया कि ‘कान्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट संविदा सेवा नियम 2022’ के बिंदु संख्या 20 के तहत स्थायी सेवा नियम बनाने की फाइल पिछले 2 वर्षों से वित्त, कार्मिक, विधि और शिक्षा विभाग के बीच झूल रही है। हर बार कोई न कोई कमी निकालकर फाइल को अटका दिया जाता है। विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा उन हजारों परिवारों को भुगतना पड़ रहा है जो वर्षों से नियमित होने की आस लगाए बैठे हैं।
SOP लागू होने के बावजूद नहीं हुए आदेश शिक्षकों ने राज्य सरकार को याद दिलाया कि 24 अक्टूबर 2024 को सरकार ने एक SOP (Standard Operating Procedure) जारी की थी। इसके तहत 27 दिसंबर 2024 तक संविदा पदों को नियमित पदों में परिवर्तित कर नियुक्ति आदेश जारी किए जाने थे। लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हाल ही में पेश हुए बजट 2026-27 में नियमितीकरण को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा न होने से संविदा कर्मियों में भारी रोष है। संघर्ष समिति ने मांग रखी- सभी संबंधित विभागों के सचिव स्तर की सामूहिक बैठक बुलाकर फाइल का तत्काल अनुमोदन किया जाए, फाइल को कैबिनेट में भेजकर जल्द से जल्द नियमितीकरण के आदेश जारी हो और संशोधित बजट में संविदा शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु ठोस घोषणा की जाए।


