सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में रिसर्च किए हुए पौधों से इस बार 2 टन सीताफल का उत्पादन हुआ है। इस साल पहली बार केंद्र की ओर से सभी सीताफलों का टेंडर किया गया था। यह टेंडर 41 हजार रुपयों का हुआ था। जबकि पिछली बार सीताफलों का पल्प निकाल कर एक्सीलेंस सेंटर के डीप फ्रिज में ही रखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि इस साल बार-बार बदलते मौसम और दीपावली तक भी गर्मी होने की वजह से सीताफल के पेड़ों पर लगे फूल भी झड़ गए थे, इसलिए इस बार उत्पादन भी कम हुआ है। बार-बार बदलते मौसम से हुआ उत्पादन सीताफल एक्सीलेंस सेंटर के उप निदेशक राजाराम सुखवाल ने बताया कि इस साल बार-बार मौसम में बदलाव हो रहा था। गर्मी थी तेज पड़ी थी। गर्मी का असर नवंबर महीने तक था। बरसात भी रुक-रुक कर हुई, जिसके कारण सीताफल के पेड़ों पर लगे फूल भी झड़ गए थे। वहीं, बदलते मौसम की मार सीताफल के फलों पर काफी पड़ा है। इस बार पहले से ही तय किया गया था कि सीताफलों को टेंडर प्रक्रिया के जरिए बेच दिया जाएगा, जिससे राजस्व आय होगी। इस बार आईपी फ्रूट्स को यह टेंडर दिया गया है। जबकि पिछली बार एक्सीलेंस सेंटर में ही फलों के पल्प निकालकर डीप फ्रीज में रख दिया गया था। पिछले साल लगभग 350 किलो पल्प निकल गया था। उन्होंने बताया कि अभी भी 100 किलो पल्प स्टॉप में है। जिसकी जैसी भी डिमांड रहती है उसे हिसाब से पल्प हम अवेलेबल करवा देते हैं। बालानगर क्वालिटी के सीताफलों की रही डिमांड आईपी फ्रूट्स के मालिक हितेश रोगानी ने बताया कि इस बार 41000 में ठेका लिया है। अब तक कुल 2 टन सीताफल हार्वेस्ट कर चुके हैं। सबसे ज्यादा बालानगर क्वालिटी के सीताफलों की डिमांड रही है। इसके बाद सुपर गोल्ड की भी डिमांड मार्केट में देखी गई है। होलसेल 20 से 50 रुपयों के बीच सीताफलों की बिक्री हुई है। जबकि 80 से 100 रुपए में सीताफलों की रिटेल में बिक्री हुई है।


