4 साल पहले मां की मौत, अब पिता की बीमारी से मौत, 3 बच्चे हुए अनाथ

भास्कर न्यूज|गुमला मां की मौत के बाद पिता का सहारा था, मगर अब पिता की भी मौत हो गई। गुमला सदर थाना क्षेत्र के करमटोली में तीन मासूम बच्चे अनाथ हो गए। रविवार की सुबह लगभग चार बजे बीमारी से 38 वर्षीय तेतरू महली की मौत घर पर ही हो गई। इसकी जानकारी बूढ़े पिता शनिचरवा महली और मां पैरो देवी को हुई तो वे लोग चीत्कार मारकर रोने लगे। इस घटना से सबके आंखों में आंसू आ गए। समाजसेवी आशीष गोप ने बताया कि चार वर्ष पूर्व कोरोना काल में तेतरू की पत्नी फूलमनी देवी की मौत हो गई थी। इसके बाद से तीनों बच्चों की देख रेख बूढ़े दादा-दादी व बाप कर रहा था। तेतरू मजदूरी का काम कर परिवार का भरण-पोषण करता था। अचानक चार दिन पूर्व सिर में जोर से दर्द हुआ तो आशीष गोप व आसपास के लोगों ने सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। शनिवार को अत्यधिक जांडिस बढ़ जाने से इलाज के लिए रांची रिम्स रेफर कर दिया। पैसा के अभाव व जानकारी कम होने के कारण बूढ़े बाप शनिचरवा महली बेटे को घर लेकर आ गया। सोचा कुछ रुपए जमाकर इलाज के लिए रांची जाया जाएगा, परंतु रविवार के सुबह में ही दम तोड़ दिया। इस बीच कई बार परिजन ग्रामीण बैंक में तेतरू की पत्नी के नाम पर सरकारी योजना से एक लाख की राशि निकलनी थी। जिसके लिए चक्कर काटते रहें। मगर कुछ ना कुछ त्रुटि व मृत्यु प्रमाण पत्र भुला जाने के कारण वहां से राशि नहीं मिली। यदि समय से राशि मिलता तो तेतरू का जान बच सकती थी। रविवार को ही सामाजिक रूप से करमटोली श्मशान घाट में तेतरू का अंतिम संस्कार किया गया। बच्चों के लालन-पालन के लिए दादा ने प्रशासन से लगाई गुहार मृतक के पिता शनिचरवा महली ने बताया कि वे स्वयं रिक्शा चलाने का काम करते हैं। तेतरू का दो बेटी 12 वर्षीय रोशनी कुमारी, 9 वर्षीय रंजनी कुमारी व पांच वर्षीय बेटा बजरंग महली है। तीनों का पढ़ाई राजकीय प्राथमिक विद्यालय करमटोली में चल रहा है। अब बच्चों का लालन-पालन में काफी परेशानी होगा। चावल भी रोज खरीद कर खाने पर विवश हैं। इतना कहकर रोने लगा। साथ ही जिला प्रशासन से बच्चें के लालन-पालन के लिए गुहार लगाया है। जिससे उनलोगों का परवरिश बेहतर तरीके से हो सके। समाजसेवी आशीष गोप ने बताया कि अपने ही पड़ोसी होने के कारण हर संभव मदद सदर अस्पताल में मेरे द्वारा किया गया। रिम्स ले जाने के लिए भी मै मदद में पीछे नहीं हटा। सदर अस्पताल में स्पेशलिस्ट चिकित्सक होते तो ऐसे कई गरीबों का जान भी बच जाती और लोगों को मदद भी मिल जाती। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों के लालन-पालन में मदद करने का प्रयास किया जाएगा। दादा-दादी के साथ तीन अनाथ बच्चें।

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