भास्कर संवाददाता | सीकर शारीरिक कमी को बबीता महला ने ताकत बनाते हुए खेलों में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। उनकी लंबाई ढाई फीट है और इस कारण उन्हें बचपन से ही ताने सुनने पड़े थे। उन्होंने तानों से परेशान होने की जगह इनसे प्रेरणा ली और स्टेट स्वीमिंग में गोल्ड सहित छह मेडल जीतकर दिखाए। अब उनका चयन अक्टूबर में होने वाली नेशनल प्रतियोगिता में हुआ है। अब वे इस टूर्नामेंट की तैयारी में जुटी हुई हैं। उनका कहना है कि नेशनल में गोल्ड मेडल जीतकर मैं सभी को करारर जवाब दूंगी, जो मुझे ताने सुनाते थे। घिरणियां बड़ा की 21 वर्षीया बबीता के पिता भंवरलाल खेती करते हैं और मां सोहनी देवी गृहिणी हैं। बबीता ने बताया कि छोटा कद होने के कारण शुरू से ही मेरा मजाक उड़ाया जाता रहा है। रिश्तेदारों व पड़ोसियों के अलावा स्कूल में भी मुझे बौनी या नाटी बुलाया जाता था। शुरू में तो मुझे परेशानी हुई, फिर मैंने ऐसे लोगों की अनदेखी शुरू कर दी। सोचा कि जो लोग मेरे कद पर हंसते हैं, कुछ बड़ा करते हुए उन्हें जवाब देना है। मैंने पढ़ाई के साथ ही खेल को चुना। छोटा कद होने से मैंने एक जगह खड़े होकर खेलने की तैयारी की। शॉट पुट व डिस्कस थ्रो का अभ्यास किया। 2021 में जयपुर के स्टेट टूर्नामेंट में जाने का मौका मिला और दो सिल्वर मेडल जीते। इसी टूर्नामेंट में सीनियर खिलाड़ियों ने बताया कि खेलों में आसानी से कॅरियर बनाना है तो स्वीमिंग सीखनी होगी। क्योंकि तैराकी में लड़कियांे की संख्या कम है। गांव में स्वीमिंग पूल नहीं था, तो मैंने सीकर के कॉलेज में एडमिशन लिया। यहां पढ़ाई के साथ स्वीमिंग की प्रैक्टिस की। बबीता के अनुसार जोधपुर की स्टेट प्रतियोगिता में 50 मीटर फ्री स्टाइल में गोल्ड मेडल जीतने से मेरा हौसला बढ़ा। फिर 100 मीटर फ्री स्टाइल में सिल्वर मेडल जीता। मुझ पर हंसने वाले लोग अब मेरे गले में मेडल देखते हैं, तो तारीफ के पुल बांधने लगे हैं। बबीता के कक्षा 10वीं में 60 फीसदी अंक आए थे। 12वीं में 86 प्रतिशत और बीए में 70 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वे अभी ज्योग्राफी में एमए कर रही हैं।


