भास्कर न्यूज | कवर्धा पंडरिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत कांदावानी के आश्रित गांव बांसाटोला तक पक्की सड़क नहीं है। मेडिकल इमरजेंसी में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। शनिवार शाम 5 बजे ऐसा ही नजारा देखने को मिला। गांव से 3 किलोमीटर दूर नेऊर-कांदावानी मेन रोड पर एंबुलेंस खड़ी थी। बीमार महिला को परिजन ने उठाकर पहाड़ी रास्तों से वहां तक पहुंचाया। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया जा सका। बांसाटोला निवासी फूलबाई बैगा (28 वर्ष) को एसाइटिस की समस्या है। शनिवार शाम अचानक तेज पेट दर्द हुआ। पति लल्लू राम बैगा ने एंबुलेंस को कॉल किया। सड़क न होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची। 3 किलोमीटर दूर मेन रोड पर रुकना पड़ा। स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं थी। बीमार महिला को पति और परिजनों ने उबड़-खाबड़ और पहाड़ी रास्तों से पैदल मेन रोड तक पहुंचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुकदूर की डॉ. प्रसंग्निा साधू के मुताबिक, पेट में तरल पदार्थ जमा होने की स्थिति को एसाइटिस कहते हैं। यह गंभीर बीमारी है। महिला इसी समस्या से ग्रसित है। प्राथमिक इलाज के बाद उसे जिला अस्पताल कवर्धा रेफर किया है। 15 किमी दूर है अस्पताल: बांसाटोला गांव की आबादी करीब 150 है। यहां स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। नजदीकी अस्पताल रूख्मी दादर में है, जो 18 किलोमीटर दूर है। वहां तक पहुंचने के लिए पहले 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। पहाड़ी रास्ते से यह दूरी 7 किलोमीटर हो जाती है। कांदावानी मेन रोड से बांसाटोला तक 3.50 किलोमीटर पक्की सड़क बननी है। सरकार से राशि मंजूर हो चुकी है लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। प्रस्तावित सड़क का 1.617 किलोमीटर हिस्सा फॉरेस्ट लैंड में आ रहा है। इस कारण काम अटका है। पीएम जन-मन योजना की 12 अन्य सड़कें भी इसी वजह से स्वीकृति के बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। इसलिए सुविधा नहीं मिल पा रही है।


