शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया

लुधियाना| स्पिक मैके लुधियाना चैप्टर ने द वर्धमान स्टील क्लासिकल सीरीज के तहत ओडिसी नृत्य की विशेष प्रस्तुति का आयोजन किया। यह कार्यक्रम बीसीएम मैनेजमेंट के अंतर्गत चल रहे चार स्कूलों में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारत की शास्त्रीय कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था। कार्यक्रम की शुरुआत ओडिसी नृत्य की जानकारी से हुई। कलाकार ने बताया कि ओडिसी की उत्पत्ति ओडिशा राज्य से हुई और इसका गहरा संबंध भगवान जगन्नाथ से है। पहले यह नृत्य मंदिरों में देवदासियों द्वारा प्रस्तुत किया जाता था, बाद में गोतीपुआ परंपरा के माध्यम से इसका विकास हुआ। आज ओडिसी भक्ति और तकनीक का सुंदर मेल है। छात्रों को भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य रूपों के बारे में भी बताया गया। ओडिसी की खास वेशभूषा, चांदी के आभूषण और मूर्तिकला जैसी देह-भंगिमाओं की जानकारी दी गई। चौका और त्रिभंगा जैसी मूल मुद्राओं का प्रदर्शन किया गया। साथ ही गर्दन, आंखों और चेहरे के भावों की बारीकियां भी समझाई गईं, जिससे छात्रों को नृत्य की तकनीकी समझ मिली। प्रस्तुति की शुरुआत मंगलाचरण से हुई, जो देवी सरस्वती की वंदना पर आधारित थी। इसमें भक्ति और ध्यान की भावना दिखाई दी। त्रिखंडी प्रणाम के माध्यम से देव प्रणाम, गुरु प्रणाम और सभा प्रणाम की परंपरा भी समझाई। दूसरी प्रस्तुति बट्टू थी, जो शुद्ध नृत्य पर आधारित रही। इसमें चौका, त्रिभंगा, जटिल पद संचालन और सुंदर मुद्राओं के माध्यम से ओडिसी की तकनीकी विशेषताएं दिखाई गईं। अंत में ओड़िया भजन अहे नीला सैला पर अभिव्यक्ति प्रधान प्रस्तुति दी गई। डॉ. संगीता बी. कुशवाहा ने एसपीआईसी मैके की सोच और योगदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बीसीएम मैनेजमेंट के डायरेक्टर अमितावा घोष का धन्यवाद किया।

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