राजधानी में मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम के अलावा स्किन में इंफेक्शन की शिकायत भी बढ़ गईं है। दरअसल दिन में एकाएक गर्मी बढ़ी और पसीना निकलने लगा है। इसी से इंफेक्शन हो रहा है और अंबेडकर अस्पताल में फंगल इंफेक्शन, घमौरी, दाद, खुजली के मरीज लगातार आ रहे हैं। इस हफ्ते स्किन विभाग की ओपीडी में रोज औसतन 25-30 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में स्किन इंफेक्शन के 10-12 मरीज ही पहुंचते हैं। फरवरी के महीने में भी यही स्थिति रहती है। जबकि इस साल मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। डाक्टरों का कहना है मई-जून के महीने में इस तरह के मरीज ज्यादा आते हैं। इस साल फरवरी में ही इस तरह के इंफेक्शन वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। स्किन रोग विशेषज्ञ डॉ मृत्युंजय सिंह ने बताया गर्मियों के मौसम में त्वचा की देखभाल जरुरी है। इस मौसम में सन बर्न या सन टैनिंग की शिकायत बढ़ जाती है।ऐसे में लोगों को धूप में निकलने से बचना चाहिए। गर्मियों में कई कारणों से डिहाइड्रेशन भी होता है, इसका सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। इससे बचने हर घंटे पानी पीना जरूरी है। नारियल पानी पीना सबसे ज्यादा बेहतर है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के पसीने से अपने आप को जितना बचाएंगे फंगल इंफेक्शन के चांस उतने कम होते जाएंगे। साथ ही डॉक्टरी सलाह के बिना बाजार या मेडिकल स्टोर्स से दवा खरीदकर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयों का सेवन करने से स्किन का इंफेक्शन बढ़ सकता है। इन बातों का रखें ध्यान ये समस्या लेकर पहुंच रहे मरीज, क्या खतरा अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में अभी कोई गर्दन, पीठ और चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकलने की शिकायत लेकर पहुंच रहा हैं। कुछ मरीज एथलीट फुट(पैर में दाद) और नेल इंफेक्शन का इलाज करवाने आ रहे हैं। कुछ गाल पर में काले धब्बों की शिकायत लेकर आ रहा है। सोराइसिस के कई पुराने मरीजों की तकलीफ भी इन दिनों बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार पसीने से चिपचिपाहट बढ़ती है और स्किन पर रैशेज आने लगते हैं। गर्मी के दिनों में फंगस और बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं। पैरों में ज्यादा पसीना आने से फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है। इस स्थिति से बचने दोपहर 12 से 2 बजे के बीच धूप में निकलने से बचना चाहिए।


