ब्यावर शहर में स्थित ‘मुंहबोले भोलेनाथ’ मंदिर अपनी अनोखी स्थापना कथा के कारण विशेष पहचान रखता है। लगभग 38-40 वर्ष पूर्व, जिस स्थान पर आज यह भव्य मंदिर है, वहां कभी कचरा डिपो हुआ करता था। स्थानीय निवासी लंबे समय से इस कचरा पात्र को हटाने की मांग कर रहे थे। एक वर्ष बारिश के मौसम में शहर के परकोटे की दीवार का एक हिस्सा अचानक ढह गया। दीवार के मलबे से भगवान भोलेनाथ की एक प्राचीन और आकर्षक पत्थर की मूर्ति प्रकट हुई। इस घटना को दैवीय संकेत मानते हुए, मोहल्लेवासियों ने वहीं मूर्ति की विधिवत स्थापना की और मंदिर का नाम ‘मुंहबोले भोलेनाथ’ रखा।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन किए गए। मंदिर समिति द्वारा पांच किलो से अधिक भांग घोटी गई, जिसमें विभिन्न प्रकार के ड्राई फ्रूट मिलाकर श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई की व्यवस्था की गई। भगवान भोलेनाथ का आकर्षक श्रृंगार भी किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। मंदिर परिसर में अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर चुके हैं। इस अवसर पर मंदिर की ओर से प्रसाद स्वरूप भांग की ठंडाई और अन्य प्रसाद सामग्री का वितरण किया जा रहा है।
मंदिर से जुड़े भक्त विकास ने बताया कि इस मंदिर की विशेषता यह है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिवर्ष शिवरात्रि पर भोलेनाथ का श्रृंगार अलग-अलग थीम पर किया जाता है, और इस वर्ष भी विशेष सजावट की गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कचरे के ढेर से प्रकट हुए ये भोलेनाथ आज पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र बन चुके हैं। प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि पर यहां भक्ति और उत्साह का विशेष माहौल देखा जाता है।


