राजस्थान क्राइम फाइल में इस बार कहानी राजस्थान के नारायणसिंह राठौड़ के मर्डर की। पेशे से वकील नारायणसिंह को लोग गोल्डनमैन कहते थे। क्योंकि वे हमेशा एक किलो से ज्यादा सोने के गहने पहने होते थे। सिंह हर दिन लाखों रुपए के जेवरात पहनकर नैनो कार में घर से निकलते थे। जहां भी जाते, सेल्फी लेने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती। घंटों तक लोग उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए लाइन लगाए रखते थे। कई बड़े कार्यक्रमों में उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता था। गोल्डमैन नारायणसिंह के नाम से पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर सहित कई जिलों के लोग परिचित थे। पांच किमी दूर सूखे कुएं में मिली लाश 27 मई 2020 की शाम को चंडावल चौकी पुलिस को चावंडिया मेगा हाईवे पर एक जली हुई कार की सूचना मिली। पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा। कार पूरी जली हुई थी। कार में कोई नहीं था। कार मालिक का पता लगाया गया। पता चला कार जोधपुर जिले के बिलाड़ा निवासी 68 वर्षीय नारायणसिंह चौधरी की है। पुलिस ने बिलाड़ा थाना पुलिस और नारायणसिंह के परिजनों से संपर्क किया। पता चला कि 27 मई की शाम को नारायणसिंह के परिजनों ने बिलाड़ा थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। इधर, कार मिलने के दूसरे दिन 28 मई की सुबह पुलिस को घटना स्थल से करीब 5 किलोमीटर दूर छितरिया बेरी गांव के एक कुएं में शव होने की सूचना मिली। सूचना मिलते सोजत के तत्कालीन डीएसपी हेमंत जाखड़ व थानाधिकारी रामेश्वरलाल सहित पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंच गया। 1 किलो सोना पहनकर घर से निकले थे शव को कुएं से बाहर निकाला गया। शव पर काफी चोटों के निशान थे। शव को सोजत सिटी हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखवाया गया। शव की शिनाख्त नारायणसिंह राठौड़ पुत्र मंगाराम सीरवी के रूप में हुई। शिनाख्त नारायणसिंह के बेटे सतपालसिंह ने की थी। सतपालसिंह ने बताया कि उनके पिता नारायणसिंह 27 मई 2020 को दोपहर 2:30 बजे अपनी निकले थे। नारायणसिंह जब घर से रवाना हुए थे तब उन्होंने एक किलो से ज्यादा का सोना पहन रखा था। शाम तक उनको काफी फोन लगाए, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऐसे में परिजनों ने थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। गला घोंटकर हत्या, गायब थे गहने परिजनों ने पुलिस को बताया था कि नारायणसिंह अपने सभी गहने पहनकर निकले थे। जब उनका शव मिला तो सभी गहने गायब थे। परिजनों ने बताया कि नारायण सिंह 940 ग्राम सोने का हार, 140 ग्राम का पगड़ी पट्टा और 250 ग्राम सोने का हार हर समय पहने रखते थे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। नारायणसिंह के साथ मारपीट की गई थी। उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। नारायणसिंह की कार पूरी तरह से जल जाने से कार से सुराग जुटाने में काफी परेशानी हुई थी। नारायणसिंह अपने गहनों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए पैसे चार्ज करने लगे थे। ऐसे में वह कई अनजान लोगों के फोटो खिंचवाने का फोन आने पर भी सभी गहने पहन अकेले ही निकल जाते थे। ऐसे में पुलिस के सामने भी यह चैलेंज हो गया था कि नारायणसिंह की हत्याकांड के जांच की शुरुआत कहां से की जाए। एक और कार के निशान मिले थे नारायणसिंह का शव जिस कुएं से मिला था। पुलिस ने दिनभर उस क्षेत्र के आस-पास की जांच की थी। पुलिस को वहां दो गाड़ियों के टायरों के निशान थे। पहले निशान नारायणसिंह की कार के थे। पुलिस के पास दूसरी कार के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही कुएं के पास कई लोगों के जूतों के निशान भी मिले थे। इसमें नारायणसिंह के जूतों के निशान नहीं थे। जिससे तय हो गया था कि नारायणसिंह की हत्या दूसरी जगह पर की गई थी। हत्या के 12 घंटे बाद मिला था शव पुलिस ने नारायाणसिंह के शव को निकालते ही मौके पर ही जांच शुरू कर दी थी। मौके पर मौजूद मेडिकल विशेषज्ञों ने जांच कर बताया कि नारायणसिंह की हत्या 12 घंटे पहले कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने अंदाजा लगा लिया कि नारायणसिंह एक दिन पहले ही अपने घर से दोपहर में निकले थे। उसके कुछ घंटों को बाद ही उनकी हत्या कर दी गई। नारायणसिंह सीवरी समाज से थे। इसके साथ ही वह अपने क्षेत्र के प्रभावी वकील भी थे। उनकी हत्या के बाद समाज व अधिवक्ताओं ने अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। पाली, सोजत व बिलाड़ा में नारायणसिंह की हत्या के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की जा रही थी। चूंकि मामला हाईप्रोफाइल था, ऐसे में पुलिस पर जल्द से जल्द केस सॉल्व करने का दबाव था। शाम को लौटने की बात कही थी हत्याकांड के तार धीरे-धीरे जुड़ने लगे। अंत में पुलिस के सामने नारायणसिंह की हत्या के जो तथ्य सामने आए वह काफी चौंकाने वाले थे। पुलिस ने इस हत्याकांड को लेकर सबसे पहले नारायणसिंह के बेटे सतपालसिंह से जानकारी ली थी। सतपाल ने बताया कि 27 मई को करीब 1:30 बजे नारायणसिंह के पास फोन आया था। उसके बाद नारायणसिंह अपने गहने पहनकर तैयार हो गए थे। उन्होंने शाम तक घर लौट आने की बात कहीं थी। इसके साथ ही सतपाल ने बताया कि 20 मई को नारायणसिंह ने बिलाड़ा थाने में एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है। पुलिस और परिजनों के शक की सुई सबसे पहले उसी व्यक्ति पर गई। पुलिस को तीन जगह से हत्यारों का ठोस क्लू मिला था। पहला क्लू नारायणसिंह के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे, दूसरा एक पेट्रोल पंप और तीसरा क्लू एक मेडिकल से मिला था। कल पार्ट-2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…


