बटाला रोड स्थित सहकार भारती कार्यालय में एफपीओ और एसएचजी के सशक्तिकरण को लेकर बैठक की । इसकी अध्यक्षता अर्थशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. सतीश वर्मा ने की और कुशल रूपरेखा सहकार भारती के विभाग प्रमुख राजिंदर सिंह बिष्ट द्वारा तैयार की गई। डॉ. सतीश वर्मा ने सरकार की नीतियों पर चर्चा करते हुए पुरजोर मांग की कि एफपीओ और एसएचजी द्वारा तैयार उत्पादों की खरीद को सरकारी नीतियों का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि पंजाब एग्रो जैसे सरकारी संस्थानों के माध्यम से इन समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। डॉ. वर्मा ने विशेष रूप से सुझाव दिया कि मिड-डे-मील, आंगनबाड़ी और सरकारी कैंटीनों में इन समूहों के शुद्ध उत्पादों को शामिल करने से किसानों को न केवल स्थायी बाजार मिलेगा, बल्कि समाज को जहरमुक्त और पौष्टिक आहार भी प्राप्त होगा। बैठक के दौरान सहयोग समाज केंद्र की ऐनी डेविस द्वारा 43 सफल एसएचजी बनाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की सराहना की गई, वहीं पंजाब सिंह के नेतृत्व में चल रहे अमितोज एफपीओ को एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही जैविक खेती के क्षेत्र में समर्पित निशान सिंह और जोबन सिंह को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए सम्मानित किया गया। राजिंदर सिंह बिष्ट ने अपनी योजना साझा करते हुए युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोड़ने और पंजाब एग्रो के जरिए छोटे समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर बल दिया। बैठक में पृथ्वी अग्रवाल, विशाल और गुरदयाल सिंह ने डॉ. वर्मा के विचारों और प्लानिंग का पूर्ण समर्थन किया।


