मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, टीवी इत्यादि के बढ़ रहे इस्तेमाल के कारण बच्चों की आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ रहा है। वहीं, यह समस्या सिर्फ शहरी इलाकों की नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों की भी है। जहां 10 व इससे ज्यादा साल की उम्र के बच्चों में कमजोर नजर, सिर दर्द, आंखों में दर्द, थकी हुई आंखें जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चों में आंखों की समस्याएं पिछले 10 साल में 10-12 फीसदी ज्यादा हो गई है। पहले जहां 100 की जांच में से 15 बच्चों में कमजोर आंखों की समस्या थी। अब यह आंकड़ा बढ़ कर 25 तक पहुंच चुका है। वहीं, इनमें भी गांव के इलाकों से पहले 3-4 मामले आते थे। अब यहां से भी 7-8 मामले आ रहे हैं। वहीं, शहरी इलाकों 15-17 केस आने शुरू हो गए हैं। केस-1:9 साल का बच्चा आंखों में थकान, सिर में दर्द की शिकायत के साथ पहुंचा। ग्रामीण इलाके से संबंधित होने के कारण पहले तो स्कूल स्तर पर हुई जांच में आंखों की रोशनी कमजोर होने की जानकारी हुई। लेकिन चश्मा न लग जाए इसलिए पैरेंट्स ने गंभीरता नहीं दिखाई। शिकायत बढ़ने पर जांच में पता चला कि नंबर भी बढ़ा है। अब इलाज के बाद चश्मा भी लगाया गया। केस-2:एक आंख की नजर हुई कमजोर: 11 साल के बच्चे की एक आंख की रोशनी पहले कम थी। जांच में पता चला भी लेकिन चश्मा लगने के डर से इलाज शुरू नहीं करवाया। लेकिन समय के साथ बच्चे की एक आंख की रोशनी लगातार कम होती गई। अब नंबर में इजाफे के बाद चश्मा लगवाया गया है।


