देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन्स में अक्षत जिंदल ने 99.76 पर्सेंटाइल प्राप्त किए, जबकि चिराग गुप्ता ने 99.73 पर्सेंटाइल हासिल किए। आर्यन गुप्ता ने 99.61 पर्सेंटाइल और प्रथम अग्रवाल ने 99.58 पर्सेंटाइल के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। ऋषि सागर ने 99.54 पर्सेंटाइल और आरव अग्रवाल ने 99.47 पर्सेंटाइल प्राप्त किए। मंथन ने 99.46 पर्सेंटाइल हासिल किए। अर्जुन सिंह क्वात्रा ने 99.34 पर्सेंटाइल, आर्यन थौर ने 99.32 पर्सेंटाइल और रिजुल जैन ने 99.20 पर्सेंटाइल प्राप्त किए। दिया जैन ने 99.15 पर्सेंटाइल और राघव भाटिया ने 99.12 पर्सेंटाइल हासिल किए। कमजोर विषय पर फोकस और मॉक टेस्ट से मजबूती : चिराग गुप्ता मैंने अपनी तैयारी में सबसे ज्यादा ध्यान अपने कॉन्सेप्ट को मजबूत करने पर दिया और सभी विषयों में नियमित प्रश्न अभ्यास किया, 99.73 पर्सेंटाइल हासिल किए। मेरा सबसे मजबूत विषय केमिस्ट्री था, जबकि फिजिक्स अपेक्षाकृत कमजोर था। कमजोर विषय को बेहतर बनाने के लिए मैंने नियमित रूप से नोट्स दोहराए और मुश्किल टॉपिक्स के प्रश्न हल किए, जिससे काफी सुधार हुआ। मॉक टेस्ट के जरिए मुझे अपने कमजोर टॉपिक्स का पता चलता और मैं उन पर खास ध्यान देता। मैं मानता हूं कि मॉक टेस्ट कभी भी नहीं छोड़ने चाहिए और बैकलॉग पूरा करने के चक्कर में चल रहे चैप्टर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तैयारी के दौरान जब भी मुझे तनाव महसूस होता था, तो मैं दोस्तों से बात कर लेता या हल्का संगीत सुनता। इससे मेरा मन शांत रहता और पढ़ाई पर दोबारा ध्यान देने में मदद मिलती थी। मेरे पिता मंगत राय गुप्ता रियल एस्टेट का बिजनेस करते हैं और मेरी माता खुशी गुप्ता हाउसवाइफ हैं। परिवार का सहयोग और समझदारी इस पूरी तैयारी के दौरान मेरे लिए मजबूत आधार बनी। मेरा संदेश है कि जितने ज्यादा हो सकें, उतने टेस्ट देने चाहिए और अच्छे स्तर का प्रश्न अभ्यास करना चाहिए। पहले प्रयास में 99.76 पर्सेंटाइल : मॉक टेस्ट और रिविजन से हुई मैंने अपने पहले प्रयास में जेईई मेन्स में 99.76 पर्सेंटाइल हासिल की। लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मैं रोज 8 से 9 घंटे पढ़ाई करता था। तैयारी की सबसे खास बात यह थी कि नए टॉपिक शुरू करने के बाद भी मैं पहले पढ़े गए विषयों का नियमित रिविजन करता रहा और आत्मविश्वास बढ़ाया। परीक्षा के अंतिम चरण में मैंने कई मॉक टेस्ट दिए और उन्हें बिल्कुल वास्तविक परीक्षा की तरह हल किया। मॉक टेस्ट विषय की समझ को मजबूत करने के साथ-साथ समय प्रबंधन और एकाग्रता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।मेरी मां प्रीति जिंदल हाउसवाइफ हैं और पिता विशाल जिंदल बिजनेसमैन हैं। दो वर्षों की इस तैयारी यात्रा में मेरे माता-पिता ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मैंने तैयारी के दौरान खुद को पूरी तरह मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों से दूर नहीं किया। मैं अपने दैनिक लक्ष्य पूरे करने या टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करने पर इन्हें एक छोटे इनाम की तरह इस्तेमाल करता था। इस तरीके से पढ़ाई बोझ नहीं बनी, बल्कि प्रेरणा का माध्यम बनी रही। मेरा मानना है कि अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए खुद को दुनिया से अलग कर लेना जरूरी नहीं है।


