बची अपहृत कोयला व्यवसायी आशिक अली की जान:रात को घर से अगवा कर ले गए थे अपराधी, बेहोशी की हालत में दामोदर नदी के पास छोड़ा

झारखंड के चतरा से गुरुवार की रात अपहृत कोयला व्यवसायी आशिक अली (40) शुक्रवार की सुबह सुरक्षित अपने घर पहुंच गए। गुरुवार की रात पिपरवार थाना क्षेत्र के न्यू मंगरदाहा निवासी आशिक अली को नकाबपोश हथियार बंद अपराधियों ने अगवा कर लिया था। अपहरण की सूचना पर पूरे कोयलांचल क्षेत्र पिपरवार और खलारी में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही टंडवा एसडीपीओ प्रभात रंजन बरवार के नेतृत्व में पिपरवार थाना प्रभारी प्रशांत कुमार मिश्रा तुरंत मौके पर पहुंचे। इसके बाद आसपास के खलारी, मैक्लुस्कीगंज और टंडवा की पुलिस द्वारा पुरे क्षेत्र में सघन छापामारी एवं सर्च अभियान चलाया गया। पुलिस द्वारा इनपुट के आधार पर ताबड़तोड़ संदिग्धों की धर-पकड़ शुरू हो गई। कोयला व्यवसायी को बाइक से घर लाया गया चारों तरफ से पुलिस द्वारा क्षेत्र की घेराबंदी और दबिश के कारण अपराधियों ने आशिक अली को घर से एक किलोमीटर दूर दामोदर नदी के पास छोड़ दिया। जहां शुक्रवार को कुछ ग्रामीण युवकों की नजर बेसुध पड़े अपहृत पर पड़ी। युवकों द्वारा आनन फानन में अपहृत कोयला व्यवसायी को बाइक से घर लाया गया। गंभीर रूप से घायल होने के कारण परिजनों द्वारा तत्काल बचरा अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया गया। कोयला व्यवसायी की बरामदगी के बाद पुलिस और परिजनों ने ली राहत की सांस अपहरण के 12 घंटे तक जहां अपहृत कोयला व्यवसायी के नहीं मिलने पर पुलिस हलकान नजर आ रही थी। वहीं, घर वाले किसी अनहोनी की आशंका से काफी बदहवास हालत में थे। अपहृत कोयला व्यवसायी आशिक अली के आवास पर काफी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई थी। घायल अवस्था में आशिक अली के घर आने पर उनके मां-बाप, बेटा, बहन व पत्नी सब उसको गले लगाकर रोने लगे। हाथ पैर बांध कर केवल मारपीट करते रहे अपराधी: आशिक अली अपराधियों के चंगुल से मुक्त होकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे कोयला व्यवसायी आशिक अली ने बताया कि गुरुवार की रात करीब साढ़े आठ बजे मैं मार्केट से घर के दरवाजे पर पहुंचा। घर के बाहर कार खड़ी कर गेट खोलने के बाद जैसे ही नीचे उतरा, तभी पांच-सात की संख्या में हथियार से लैस मुंह बांधे अपराधियों द्वारा मुझे पकड़ लिया गया। मेरे चिल्लाने पर मेरा बेटा और पिताजी ने अपराधियों से मुझे छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन मेरे बेटे को पिस्टल की बट्ट से मारकर और पिताजी को हथियार का भय दिखाते हुए मुझे घसीटते हुए पास स्थित स्कूल के पीछे ले गए। वहां अपराधियों की बाइक खड़ी थी। अपराधियों द्वारा मुझे बंदुक की नोक पर बाइक पर बैठाकर पास के जोबिया गांव ले जाया गया, जहां कुछ और अपराधी जुट गए। वहां से मेरे हाथ-पैर बांध कर मुझे दामोदर नदी पारकर जंगल में ले जाया गया, जहां मुझे जानवरों की तरह पीटा गया। रातभर मुझे पीटने के बाद मुझे पानी तक नहीं दिया गया। मारपीट के बाद मैं बेहोश हो गया था। सुबह जब मुझे होश आया तो मैंने अपने आप को दामोदर नदी के पास पाया, जहां मौजूद एक ग्रामीण को इशारे से बुलाया। जो मुझे लेकर मेरे घर तक आया। पहले भी दो बार हो चुका है हमला, मिल रही थी धमकी कोयला व्यवसायी आशिक अली पहले से ही उग्रवादियों के निशाने पर थे। इसके पूर्व उन पर 12 नवंबर को फायरिंग की गई थी, जिसमें वो बाल-बाल बचे थे। इसके बाद जनवरी में उनके घर के पास अपराधियों द्वारा इसको निशाना बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन ग्रामीणों की सक्रियता से अपराधी भाग गए थे। सूत्रों के अनुसार, कोयला व्यवसायी आशिक अली पर पुलिस की मुखबिरी के शक में टीपीसी के उग्रवादियों द्वारा अपहरण की घटना को अंजाम दिया गया है। हालांकि किसी भी उग्रवादी संगठन द्वारा अभी तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली गई है। घटना में शामिल लोगों को चिन्हित कर लिया गया है: टंडवा एसडीपीओ पुलिस की सक्रियता और दबिश के कारण अपराधियों को 12 घंटे के भीतर आशिक अली को छोड़ना पड़ा। इस घटना में उग्रवादी संगठन टीपीसी की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस द्वारा तकनीकी सर्विलांस और अन्य सोर्स से अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। -प्रभात रंजन बरवार, एसडीपीओ, टंडवा

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