इको-फ्रेंडली सजावट का बढ़ता क्रेज, बालकनी से ड्राइंग रूम तक छाए देसी गमले

भास्कर न्यूज। लुधियाना। शहरों में होम डेकोर का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। जहां एक समय प्लास्टिक और फाइबर के रंग-बिरंगे गमलों का चलन था, वहीं अब टेराकोटा पॉट्स ने दोबारा अपनी जगह बना ली है। बालकनी गार्डन, रूफटॉप और यहां तक कि ड्राइंग रूम के कोनों में भी मिट्टी के गमले नजर आने लगे हैं। लोग अब सिर्फ पौधे लगाने के लिए नहीं, बल्कि घर की सजावट को प्राकृतिक स्पर्श देने के लिए टेराकोटा पॉट्स चुन रहे हैं। टेराकोटा पॉट्स का यह ट्रेंड दि​खाता है कि लोग आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं। मिट्टी की सादगी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और डेकोर में नैचुरल टच इन तीनों का मेन टेराकोटा को खास बना रहा है। बदलते दौर में यह सिर्फ गमला नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है। पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी इस ट्रेंड को मजबूती दी है। प्लास्टिक के मुकाबले टेराकोटा पूरी तरह प्राकृतिक और बायोग्रेडेबल होता है। यह मिट्टी से बनता है और उपयोग के बाद दोबारा प्रकृति में मिल जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े असर डालते हैं, इसलिए लोग सजावट में भी सस्टेनेबल विकल्प अपना रहे हैं। { वायु संचार से जड़ों को मिलती है पर्याप्त ऑक्सीजन {मिट्टी के बने होने से इनमें हवा का संचार होता है, जिससे पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन मिलती रहती है। {अतिरिक्त पानी सोखने की क्षमता होने से जड़ों में पानी भराव (वॉटर लॉगिंग) कम होता है। {गर्मी में मिट्टी ठंडी रहती है, जो पौधों के लिए फायदेमंद है। पौधों के लिए बेहतर, सेहतमंद विकल्प : गार्डनिंग एक्सपर्ट बताते हैं कि टेराकोटा पॉट्स पौधों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इनकी सतह सांस लेती है, जिससे मिट्टी में अतिरिक्त नमी नहीं रुकती और जड़ों को सड़न से बचाव मिलता है। खासकर इंडोर प्लांट्स जैसे स्नेक प्लांट, मनी प्लांट और सक्यूलेंट्स के लिए यह बेहतर माने जाते हैं। यही वजह है कि गार्डनिंग के शौकीन लोग अब प्लास्टिक की जगह मिट्टी के गमले चुन रहे हैं। { डेकोर में देसी और मॉडर्न : टेराकोटा पॉट्स अब सिर्फ सादे भूरे रंग तक सीमित नहीं हैं। बाजार में पेंटेड, टेक्सचर्ड और हैंड क्राफ्टेड डिजाइन वाले गमले उपलब्ध हैं। कुछ पर वारली आर्ट, मधुबनी पेंटिंग या ज्योमेट्रिक पैटर्न बनाए जा रहे हैं, जिससे वे मॉडर्न इंटीरियर के साथ भी आसानी से मैच हो जाते हैं। कई लोग पुराने टेराकोटा पॉट्स को खुद पेंट कर डीआईवाई डेकोर तैयार कर रहे हैं, जो ट्रेंड कर रहा है। { लोकल कारीगरों को मिल रहा सहारा : इस बढ़ती मांग से स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों को भी फायदा हो रहा है। त्योहारों और वेडिंग सीजन में टेराकोटा पॉट्स की बिक्री बढ़ जाती है। कई लोग इन्हें गिफ्टिंग आइटम के तौर पर भी चुन रहे हैं। इससे पारंपरिक कला को नया बाजार मिल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल और पौधों के लिए बेहतर : इन गमलों का उपयोग घर, बालकनी, छत और गार्डन में सजावटी व औषधीय पौधे लगाने के लिए किया जाता है। हालांकि ये प्लास्टिक गमलों की तुलना में थोड़े भारी और टूटने योग्य होते हैं, लेकिन पर्यावरण के अनुकूल और पौधों के लिए बेहतर माने जाते हैं।

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