अभिनत्री तापसी पन्नू अपनी नई कोर्टरूम ड्रामा फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर चर्चा में हैं। वास्तविक घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म रिलीज हो गई है। फिल्म में तापसी एक वकील की भूमिका निभा रही हैं। निर्देशक अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित इस फिल्म के बारे में तापसी ने अपने रोल और शूटिंग से जुड़े अनुभवों पर दैनिक भास्कर से बातचीत की। फिल्म की स्क्रिप्ट के बारे में आप क्या कहना चाहेंगी? जब मैंने स्क्रिप्ट पहली बार सुनी, तो मेरे दिमाग में कई सवाल उठे। मैंने कुछ आंकड़े सुने थे, जिनके अनुसार रोजाना लगभग 80 अपराध होते हैं। यह बात हम कितने समय तक नजरअंदाज कर सकते हैं और क्यों करें, यह सोचने वाली बात थी। मुझे इस बात से अनजान रहने का अफसोस हुआ और महसूस हुआ कि मुझे अपने इस माध्यम से लोगों तक यह संदेश जरूर पहुंचाना चाहिए। हालांकि उस समय यह सोचकर थोड़ा डर भी लगा कि इस रोल को निभाते हुए कैसा लगेगा और क्या लोग इसे पसंद करेंगे। लेकिन मैंने हिम्मत की और इस चुनौती को अपनाया। क्या लोगों को महिला प्रधान फिल्में ज्यादा आकर्षित करती हैं? हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता। कई बार लोग इन फिल्मों को सिनेमाघरों में देखने की बजाय ओटीटी पर ही देखना पसंद करते हैं। लेकिन अब स्थिति थोड़ी बदल गई है। अब प्लेटफॉर्म वाले सोच रहे हैं कि वे महिला प्रधान फिल्में देखने वाले दर्शकों को अपने पास खींच चुके हैं। इसलिए अब वे पुरुष प्रधान फिल्में खरीदना और उनके दर्शकों को आकर्षित करना चाहते हैं। इस फिल्म के लिए क्या खास तैयारियां कीं? इसके लिए मैंने पटियाला फैमिली कोर्ट का दौरा किया, यह देखने के लिए कि वहां कैसे काम होता है और वकील इस तरह के केसों में कैसे पेश आते हैं। इसके अलावा, अनुभव सिन्हा की भी मुझे इसमें बहुत मदद मिली। हमने पहले भी दो फिल्में साथ की हैं, इसलिए अब वे मेरे दोस्त की तरह हैं। काम न करने पर भी हमारी बातचीत जारी रहती है। मैं उनकी बहुत इज्जत करती हूं क्योंकि वे उन कम लोगों में से हैं जिनमें पढ़ने और रिसर्च करने का बहुत शौक है। हमारा तालमेल भी हमेशा अच्छा रहा है। क्या आपको लगता है कि इंडस्ट्री में अब बदलाव दिखाई दे रहा है? हर समय कोई न कोई बदलाव होता ही है। बदलाव 2016 के दौरान आया था जब ‘पिंक’ रिलीज हुई थी। उस समय हर तरह के सिनेमा पर फिल्में बन रही थीं और दर्शकों ने उन्हें पसंद भी किया। वहीं कोविड के बाद से लोग घर पर ओटीटी पर फिल्में देखना पसंद कर रहे हैं। इसके कारण सिनेमा को भी बदलाव की आवश्यकता है। आप इस फिल्म को लेकर दर्शकों को क्या कहेंगी? मैं बस यही कहना चाहती हूं कि अगर किसी फिल्म का ट्रेलर आपको अच्छा लगे, तो उसे जरूर एक मौका दें और अगर आपको फिल्म अच्छी लगी, तो जितनी जोर से आलोचना करते हैं, उतनी ही जोर से उसकी तारीफ भी करें। यही संतुलित दृष्टिकोण सिनेमा और फिल्म निर्माताओं के लिए सबसे मददगार है। सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, सोचने पर मजबूर करेगी ‘अस्सी।’


