भ्रष्टाचार में 70 फीसदी आरोपी अफसर-कर्मचारी बरी:एससी-एसटी मामलों की अदालतों में सिर्फ 6 प्रतिशत मामलों में ही निर्णय, उनमें भी 77 प्रतिशत बरी

एसीबी रोजाना कितने ही छापे मार ले,लेकिन अनुसंधान की खामियां कहें या फिर कोर्ट में कमजोर पैरवी की वजह से भ्रष्टाचार में लिप्त सरकारी अफसर एवं कर्मचारी अदालतों से बरी हो रहे हैं। खुद को अदालत से पाक साफ घोषित करवाने में सफल हो रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य राजस्थान अभियोजन निदेशालय की विधानसभा में पेश 2024 की रिपोर्ट में ऐसा ही बड़ा खुलासा हुआ है। सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024 में अदालतों से निस्तारित भ्रष्टाचार के कुल मामलों में 70 प्रतिशत से ज्यादा आरोपी अफसर-कर्मचारी बरी हो गए हैं। सिर्फ 30 प्रतिशत को ही सजा दिलाई जा सकी है। ऐसा लगातार दूसरी साल हुआ है। पिछले सालों में सजा का प्रतिशत 45 प्रतिशत से अधिक ही रहा है। अभियोजन निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई के लिए राज्य में 18 अदालतें हैं। इन न्यायालयों में राजस्थान अभियोजन सेवा के सहायक निदेशक स्तर के 18 विशेष लोक अभियोजक पैरवी करते हैं। वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संबंधित 3930 प्रकरण विचाराधीन रहे। एक साल के दौरान इन विशेष अदालतों में 331 प्रकरणों का निस्तारण किया गया और 3599 प्रकरण पेंडिंग रहे। प्रभावशाली अपराधियों का सिस्टम से गठजोड़ इसके प्रमुख कारण साक्ष्यों की कमजोर स्थिति, लंबी न्यायिक प्रक्रिया व प्रभावशाली अपराधियों का सिस्टम से गठजोड़ इसके प्रमुख कारण है। इसके लिए डिजिटल ट्रांसपरेंसी, स्वतंत्र जांच एजेंसी व फास्ट ट्रेक कोर्ट प्रभावी भूमिका निभा सकते है। -शशांक पंचोली, एडवोकेट महिला अत्याचार के मामलों में सजा प्रतिशत कम रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला अत्याचार से संबधित प्रकरणों में भी सजा के प्रतिशत में लगातार गिरावट आई है । बरी होने वाला का आंकड़ा बढ़ रहा है। महिला अत्याचार से संबंधित विशिष्ट न्यायालयों में से दो अदालतों में अभियोजन सेवा के सहायक निदेशक स्तर के विशेष लोक अभियोजक पदस्थापित है। धाराओं में सजा का आंकड़ा 13 प्रतिशत गिरा अभियोजन निदेशालय की इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 में अधीनस्थ अदालतों में 6 लाख 6 हजार 721 प्रकरण विचाराधीन रहे। इनमें 87 हजार 895 प्रकरणों में कोर्ट में निर्णय आया। सजा का प्रतिशत महज 47.16 प्रतिशत रहा। जबकि, 2023 में कुल निस्तारित प्रकरणों में 60.02 प्रतिशत को सजा मिली थी। यानी सजा का आंकड़ा करीब 13 प्रतिशत तक गिरा है। अनुसूचित जाति-जनजाति मामले राजस्थान में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में गठित विशेष न्यायालयों में से नौ में राजस्थान अभियोजन सेवा के अधिकारी तैनात है। इन अदालतों में वर्ष 2024 में 6.25 प्रतिशत मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें सजा का प्रतिशत महज 22 फीसदी रहा है। वर्ष कुल मामले निस्तारित बरी सजा 2024 – 3930 – 331 – 70.1% – 29.9% 2023 – 4082 – 338 – 60.6% – 39.4% 2022 – 3955 – 266 – 47.30% – 52.70%

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