खुद की पब्लिसिटी के लिए महिलाओं की निजता भंग करना गलत है। जयपुर के ऐसे फिजियोथैरेपिस्ट की गलत प्रैक्टिस सोशल मीडिया पर उनके पेजों पर पब्लिकली देखने को मिल रही है। इन पेजों पर अपलोड वीडियो और फोटो आपत्तिजनक हैं। इसमें पेशेंट्स को थेरेपी के दौरान उनकी पीठ और कूल्हे तक के वीडियो बिना धुंधला किए और बगैर चेहरा छिपाए यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम पर डाले गए हैं। ज्यादातर महिलाओं के हैं। हैरत की बात है कि ऐसे कॉन्टेंट को रोकने के लिए कोई अथॉरिटी ही नही हैं। भास्कर के पास जयपुर के ऐसे 12 फिजियोथैरेपिस्ट के वीडियो हैं मगर निजता के चलते हम चैनल का नाम नहीं छाप रहे हैं। निजता भंग; एक कमरे में चल रहे फिजियोथैरेपी सेंटर; न लाइसेंस, ना जिम्मेदारी फिजियोथैरेपी सेंटरों पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है, क्योंकि इनके रजिस्ट्रेशन और अन्य कार्रवाई के लिए आज तक कोई काउंसिल ही नहीं बन सकी है। 77 बीएनएस का उल्लंघन डिस्ट्रिक्ट बार एसो. के पूर्व अध्यक्ष विवेक शर्मा, सुनील उदेईया का कहना है कि फोटो-वीडियो अपलोड करना 77 बीएनएस का उल्लंघन है। इसमें सहमति हो सकती है, लेकिन गलत उद्देश्य से किया तो 1 से 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।


