ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिजीज इंडिया और स्वावलंबन फाउंडेशन के सहयोग से रेस फॉर 7 वॉक रविवार को पाली के बांगड़ स्कूल से रवाना हुई। सूरजपोल होते हुए वापस बांगड़ स्कूल पहुंच सम्पन्न हुई। इस पहल का उद्देश्य दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रभावित मरीजों को सहयोग देना था। देशभर में 20 से अधिक स्थानों पर ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिजीज इंडिया इसका आयोजन किया गया।
फाउंडेशन के नितेश तोषावरा ने बताया कि रेस सुबह 6 बजे ध्वज फहराने के साथ हुआ। जिसमें 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को टी-शर्ट, मेडल और ई-प्रमाण पत्र दिए गए। रेस में दिव्यांगजनों ने भी बैसाखी, ट्राइसाइकिल के ज़रिए भाग लिया। इस मौके पर भीलवाड़ा के विनोद जैन ने कहा कि दुर्लभ रोगों से जूझना आसान नहीं, लेकिन जागरूकता और सहयोग हमें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। यह देखकर खुशी होती है कि समाज हमें समझने और स्वीकारने के लिए आगे आ रहा है। सुमेरपुर के जेठाराम कुमावत ने कहा हमें अवसर और पहचान चाहिए। मंच संचालन कमलेश सोनी ने किया। इस दौरान जयेश लोढ़ा, अल्ताफ़ हुसैन, वैभव सोनी, युगल कुमावत, हितेश मादडी, रमन विश्नोई, अक्षत लोढ़ा, चंद्रप्रकाश वागोरिया, अजय जांगिड़, मयंक भाटी, जिनेश चोपड़ा, दीपक सोनी, विनय गादिया, सिद्धार्थ बोकड़िया, विकास उपाध्याय सहित अन्य उपस्थित रहे। बतौर मुख्य अतिथि अभाविप के प्रांत अध्यक्ष सहायक प्रोफेसर हीराराम बराड़ ने कहा कि दुर्लभ रोगियों को सिर्फ चिकित्सा सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक सहयोग की भी जरूरत होती है। ऐसे आयोजनों से जागरूकता बढ़ेगी और जरूरी नीतिगत बदलाव संभव होंगे। प्रोफेसर सुरजीत घोष ने कहा कि यह रेस केवल शारीरिक भागीदारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। स्वावलंबन फाउंडेशन के फाउंडर डॉ. वैभव भंडारी ने कहा हर कदम मायने रखता है, हर आवाज जरूरी है।


