केवलादेव घना की निकटता और पक्षियों के प्रेम ने ब्रज नगर में रहने वाली कविता सिंह के घर को लिटिल बर्ड क्लब बना दिया है। यहां प्रतिदिन स्थानीय 20 प्रजाति की 200 से ज्यादा चिडिया दाने-पानी के लिए आती हैं। कविता सिंह का यह पक्षी प्रेम पुराना है और वक्त के साथ गाढ़ा होता रहा है। इसलिए पक्षियों का विश्वास भी बढ़ रहा है। इसलिए कविता की आवाज के साथ ही पक्षियों का जुटना प्रारंभ हो जाता है। कविता सिंह ने इसके लिए विशेष इंतजाम भी किए हैं। अपने निवास परिसर को पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय में बदल दिया है। बड़े पक्षियों जैसे कबूतर, डव, तोता और मोर के लिए ऊंचे स्टैंड पर दाना-पानी की व्यवस्था है, जबकि छोटी चिड़ियों विशेषकर गौरैया और मुनिया के लिए स्वचालित फीडर लगाए गए हैं। स्नान और जलपान के लिए फाउंटेन की सुविधा है, जहां दिनभर सैकड़ों पक्षी कलरव करते दिखाई देते हैं। मुनिया के लिए विशेष रूप से कंगनी की व्यवस्था की जाती है। प्रतिमाह लगभग एक कुंटल कंगनी और चार कुंतल ज्वार, बाजरा, गेहूं का दलिया व उबले चावल डाले जाते हैं। कंगनी को मुनिया खास तौर पार खाती है। इसलिए इसे जयपुर से मंगाया जाता है। प्रतिदिन 200 से ज्यादा संख्या में पक्षियों का समूह यहां देखा जा सकता है। फीडर, फाउंटेन और घोंसलों से पक्षियों को मिल रहा सुरक्षित बसेरा संदेश…प्रकृति से जुड़ाव जरूरी प्रकृति प्रेमी कविता सिंह कहती है कि प्रकृति के जुड़ाव जरूरी है। क्योंकि इससे संवेदनशीलता आती है और व्यक्ति हमेशा खुशमिजाज रहता है। यह पहल संदेश देती है कि प्रकृति से जुड़ाव बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच से आता है।


