सादड़ी क्षेत्र की 62 वर्षीय किसान हंजा देवी मेघवाल जिले की ऐसी पहली किसान हैं, जो खुले खेत (बिना पॉलीहाउस) स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं। जिले में अधिकतर किसान स्ट्रॉबेरी को केवल पॉलीहाउस या शेडनेट में उगा रहे हैं, लेकिन हंजा देवी ने कृषि पर्यवेक्षक बेटे नरेश की सलाह से यह प्रयोग किया, इन्हें खुले में उगाया। स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्म चयन कर उचित मल्चिंग, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल का चयन किया। भीलवाड़ा की नर्सरी से स्ट्रॉबेरी की पौध लेकर आए। उन्होंने बताया कि ट्रायल के आधार पर पहली बार 20 अक्टूबर को एक हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए थे। अभी तक 900 पौधे जिंदा हैं। पौधों से फल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। रोजाना 7 से 10 किलो तक फल तोड़कर बेच रहे हैं। हंजा देवी ने बताया कि पूरी फसल में केवल जैविक खाद का ही उपयोग किया गया है। इसमें जीवामृत, नीम तेल, वर्मी कम्पोस्ट ही डाल रहे हैं। फसल में पेस्टीसाइड और इनसेक्टीसाइड का उपयोग बिलकुल भी नहीं किया गया है। यह फसल मार्च तक रहेगी। जनवरी में ही बाजार में स्ट्रॉबेरी बेचना शुरू कर दिया था। अब एकड़ में लगाएंगे फसल वे बताती हैं कि स्ट्रॉबेरी के छोटे आकार के फल 150 रुपए प्रति किलो और बड़े आकार के फल 300 रुपए किलो तक बाजार में बिक जाते हैं। प्रयोग सफल रहा और मुनाफा बढ़ा है, इसलिए अगली बार एक एकड़ क्षेत्र में खुले में स्ट्रॉबेरी की फसल लगाएंगे। दूसरी ओर हंजा देवी ने उद्यान विभाग द्वारा 95 प्रतिशत अनुदान पर लगाए गए दो एकड़ के शेडनेट हाउस में खीरे की फसल लगा रखी है। मई से सितंबर के 100 दिनों में 2 एकड़ में खीरे की फसल लगाई। इनमें 8 लाख की लागत आई। वहीं, 100 दिन की फसल से 13 लाख के खीरे की फसल बेची। इसके बाद फिर से अक्टूबर में 2 एकड़ में 4.5 लाख की लागत से खीरे की फसल लगाई। उसमें से अब तक 5 लाख की बेच चुकी हैं। यह फसल मार्च के पहले सप्ताह तक चलेगी। तब तक 21 लाख से अधिक की फसल बेच चुके होंगे। इसमें लागत 12 से 13 लाख की हो जाएगी। हंजा देवी ने बताया कि शेडनेट संरचना के कारण तापमान व आर्द्रता का संतुलन तो होता ही है कीट एवं रोग का प्रकोप भी कम होता है।


