जिला अस्पताल को डिजिटल करने की तैयारी:एसआईआर: सबसे ज्यादा पूर्व में 28881, खाजूवाला में 17689, पूरे जिले में कुल 103600 वोट काटे गए

एसडीएम जिला अस्पताल को पूर्ण रूप से डिजिटल करने की तैयारी चल रही है। यह शत प्रतिशत डिजिटल होने वाला प्रदेश का पहला जिला अस्पताल हो सकेगा। अभी तक ये सुविधा बड़े प्राइवेट व कॉरपोरेट अस्पतालों के साथ साथ सरकारी क्षेत्र मे केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों जैसे एम्स, ईएसआई, रेलवे के अस्पतालों मे मिल रही थी। केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जिला अस्पताल में मरीजों का समस्त कार्य आयुष्मान भारत (आभा) आईडी के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार द्वारा संचालित आईएचएमएस पोर्टल को आभा आईडी से जोड़ा जा चुका है, जिससे आईएचएमएस पोर्टल के साथ साथ आधार कार्ड व मोबाइल नंबर से ही मरीजों की आभा आईडी बनाई जा सकेगी और मरीजों को स्कैन एंड शेयर की सुविधा मिल सकेगी। इससे मरीज के पंजीकरण से लेकर चिकित्सक के बिमारी की जांचों के साथ डायग्नोसिस, उपचार, डिस्चार्ज, रेफरल और फॉलोअप तक की संपूर्ण प्रक्रिया का डिजिटलीकरण किया जाएगा। मरीज आभा आईडी के माध्यम से घर बैठे आयुष्मान भारत और आरोग्य सेतु एप्लिकेशन के द्वारा अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक करा सकेंगे। मरीज को मोबाइल पर मिलेगी पूरी जानकारी मरीज को इन सभी प्रक्रियाओं की समय समय पर अपडेट की जानकारी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मिलेगी और अंत में मरीज को मिलने वाले उपचार की कीमत की भी जानकारी मैसेज और पोर्टल पर मिलेगी। मरीजों के इलाज का संपूर्ण विवरण रियल टाइम मे रिकॉर्ड होगा और आगे होने वाली सभी हॉस्पिटल विजिट मे आभा आईडी के माध्यम से चिकित्सक द्वारा सभी पुराने उपचार और जांच रिपोर्ट्स देखे जा सकेंगे, जिससे मरीज की सही हिस्ट्री की जानकारी उपलब्ध रहेगी और पुराने उपचार का वर्तमान निदान व उपचार मे उपयोग किया जा सकेगा। “सभी चिकित्सकों और स्टाफ की हेल्थ प्रोफेशनल आईडी बनाई जा चुकी है। अस्पताल में चर्मरोग विभाग में इसे लागू किया गया है। रोज तीस मरीजों का उपचार पोर्टल के माध्यम दर्ज किया जा रहा है। अगले दो महीने में लॉजिस्टिक की खरीद करके इसे पूरे अस्पताल में लागू किया जाएगा।”
-डॉ. सुनील हर्ष, अधीक्षक जिला अस्पताल। जिला अस्पताल में रोज 1200 से अधिक का ओपीडी जिला अस्पताल शहर की करीब पांच लाख की आबादी को कवर करता है। यहां रोज ओपीडी की संख्या 1200 से 1500 के बीच रहती है। मॉड्यूल को फिलहाल डॉक्टर और फार्मेसी स्टोर पर ही लागू करके परखा जा रहा है। सोमवार के दिन मरीजों ज्यादा होते हैं। ऐसे काम करेगा आईएचएमएस मरीज को डिजिटल टोकन मिलेगा जिसका कन्फर्मेशन अस्पताल के काउंटर से होगा। इसके बाद चिकित्सक की डिजिटल डेस्क पर मरीज की संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी जिसके आधार पर चिकित्सक द्वारा संबंधित मरीज का चिकित्सकीय परीक्षण किया जाएगा और मरीज की बीमारी के लक्षण, निदान, लैब जांच की मांग और समस्त उपचार व क्लिनिकल टिप्पणियों को ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। मरीज की लैब और रेडियोलॉजी संबंधी जांच की रिक्वेस्ट को लैब और रेडियोलॉजी की डिजिटल डेस्क पर कंफर्म करते हुए मरीज के सैंपल और एक्सरे लिए जाएंगे जिनकी रिपोर्ट स्वतः पोर्टल पर अपलोड हो जाएगी, जिसे संबंधित चिकित्सक अपनी डिजिटल डेस्क और मरीज आयुष्मान भारत एप्लिकेशन के माध्यम से घर बैठे देख सकेगा। इसके लिए लैब और रेडियोलॉजी विभाग की सभी मशीनों को आइएचएमएस पोर्टल के लैब मॉड्यूल से जोडा जाएगा और मरीजों को लैब रिपोर्ट्स के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पडेगा।

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