शिक्षा विभाग में जिस काम के लिए सलाहकार लगाया गया, वही शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी विभागों में बकाया पेंशन प्रकरण को लेकर सबसे आगे है। हालात ये हो गए कि पहली बार वित्त विभाग अब साल में चार बार कैंप लगाएगा, ताकि पेंशन प्रकरणों का निस्तारण हो सके। अमूमन वित्त विभाग ऐसा नहीं करता, मगर पहली बार ये पहल की है। मगर सवाल ये है कि जिस महकमे में जिन कामों के लिए सलाहकार रखे गए, विभाग उसी में पिछड़ रहा है। शिक्षा निदेशालय में सुरेन्द्र कुमार पुरोहित को सलाहकार नियुक्त करने के साथ ही उनके जिन कामों का बंटवारा किया गया, उसमें पेंशन प्रकरणों का निस्तारण भी दिया गया है। मगर 18 फरवरी को वित्त विभाग ने जो परिपत्र जारी किया, उसमें साफ लिखा है कि शिक्षा विभाग के पेंशन प्रकरणों में सबसे ज्यादा कठिनाई हो रही है। शिक्षा विभाग से प्रतिवर्ष 11,000 कार्मिकों को पीपीओ जारी किए जाते हैं। 31 मार्च 2026 तक 2200 कार्मिक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 700 तो रिटायर हो भी चुके हैं, मगर उनके पेंशन प्रकरण अब तक विभाग को नहीं मिले। इस कारण उनकी पेंशन जारी नहीं हो पाई। इसलिए पहले चरण में शिक्षा विभाग में ही पेंशन अदालत लगाई जाएगी। संभाग स्तर पर पेंशन अदालतें लगेंगी और संबंधित व्यक्ति की समस्या का मौके पर निस्तारण करने का प्रयास होगा। इसमें संबंधित अधिकारियों की भी मौजूदगी अनिवार्य की गई है। ये आदेश वित्त विभाग के शासन सचिव राजन विशाल ने जारी किए। ओम थानवी संजय धवन नूतन हर्ष एक काम- दो सलाहकार नूतन हर्ष के जिम्मे जो काम मिला है, उसमें योजना-गैर योजना मदों में होने वाली बीएफसी की बैठक के प्रस्ताव तैयार करना है। साथ ही विधानसभा में पूछे गए बजट संबंधी सवालों के जवाब भी तैयार करना है। साथ ही साइकिल, टैबलेट क्रय के संबंध में भी जिम्मेदारी है। अब सुरेन्द्र पुरोहित के पास भी योजना मदों में बीएफसी के समय वित्त विभाग में प्रस्तुत करने का जिम्मा है। संजय धवन के पास पहला ही जिम्मेदारी वाला प्वाइंट है कि वे सरकार की बजट घोषणाओं का सफल संचालन कराएं। जन लेखा समिति की बैठक का जिम्मा धवन पर भी है। जन लेखा समिति का काम ओम थानवी पर भी है। सुरेन्द्र कुमार पुरोहित


