धौलपुर जिले के सैंपऊ उपखंड के नुनहेरा गांव में स्कूल जाने वाले मुख्य रास्ते पर जलभराव और कीचड़ की समस्या से छात्र-छात्राएं परेशान हैं। यह स्थिति पिछले 5 साल से बनी हुई है, जिससे स्टूडेंट्स को स्कूल पहुंचने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। गांव के मोहल्लों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह रास्ता सालभर पानी और कीचड़ से भरा रहता है। ग्रामीणों और विद्यार्थियों का कहना है कि इस समस्या के बारे में प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। कीचड़ में होकर गुजरते है स्टूडेंट्स
छात्र-छात्राओं को कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। पहले वे खेतों की पगडंडी का उपयोग करते थे, लेकिन अब किसानों द्वारा तारबंदी और बिजली के तार लगाए जाने के कारण वह रास्ता भी बंद हो गया है। इस वजह से मुख्य कीचड़ भरा रास्ता ही एकमात्र विकल्प बचा है। कई बार हो जाते है चोटिल
कई बार विद्यार्थी फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे उन्हें चोट लगती है और कपड़े खराब होने पर वापस घर लौटना पड़ता है। गांव में 12वीं तक का स्कूल है और इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं भी चल रही हैं।
गांव के युवा करन परमार के नेतृत्व में ग्रामीणों और छात्रों ने धौलपुर प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद प्रशासन की ओर से जेसीबी लगाकर करीब चार घंटे तक रास्ता साफ करने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने लगाया आरोप
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि 40 फीट का रास्ता साफ करने के आदेश के बावजूद केवल 20-25 फीट तक ही सफाई कर औपचारिकता पूरी कर दी गई। उनका यह भी आरोप है कि एसडीएम द्वारा 40 फीट रास्ता साफ करने और स्कूल के सामने गड्ढे के चारों ओर तारबंदी के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। बजट की कमी का हवाला देकर मामले को टालने का आरोप भी लगाया गया है।


