भास्कर न्यूज| सरायकेला सरायकेला प्रखंड के घोड़ालांग गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान के छठे दिन वृंदावन के कथावाचक पंडित महेंद्र शर्मा महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला, नंदोत्सव, राक्षसी पुतुना वध, कालियादमन लीला, महारास लीला, रुकमणि विवाह आदि का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जगत में भगवान की कृपा बिना कुछ भी संभव नहीं है। परंतु मानव को समाजहित में अच्छे कर्म करना चाहिए। प्राप्त ओहदा का सदुपयोग करना चाहिए व फल की कामना किए बगैर कर्म करते रहना चाहिए। अच्छे कर्म का फल हमेशा अच्छा मिलता है और बुरे कर्म का फल बुरा होता है। इसलिए हमें हमेशा सत्कर्म करना चाहिए। महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जब मात्र छह दिन के थे, तब राक्षसी पुतना श्रीकृष्ण को मारने गोकुल पहुंची थी। कृष्ण ने पुतना का वध किया था। श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला दिव्य व आध्यात्मिक थी। कथावाचक ने रासलीला के बारे में बताया कि इसमें भगवान श्रीकृष्ण व गोपियों की रासलीला में निश्चल प्रेम का प्रमाण मिलता है। कथावाचक ने कहा कि हम सांसारिक मोहमाया में पड़कर भगवान को भूल जाते हैं। जबकि विपत्ति आने पर भगवान को याद करते हैं। कथावाचक ने वर्तमान समय के सेल्फी दौर का जिक्र करते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि आप लोग अपनी अच्छी चरित्र व कैरियर का निर्माण करें। बता दें कि चरित्रवान व सफल व्यक्ति को सेल्फी लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। उसके साथ दूसरे लोग सेल्फी लेते है। इस अवसर पर श्रीकृष्ण- रुक्मणि विवाह की झांकी निकाली गई जिससे कार्यक्रम अत्यधिक आकर्षक बना गया था। इस झांकी में बने कृष्ण और रुखमणि ने एक दूसरे को फूलों की माला पहनाकर विवाह रस्म पूरी की। झांकी में बने रुखमणि के माता पिता ने कन्यादान का भी रस्म निभाया। श्रीमद्भागवत कथा को लेकर घोड़ालांग व आसपास के गांवों में भक्तिमय महौल बना हुआ है। इस कार्यक्रम को देखने के लिए घोड़ालांग व आस पास गाँव के श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी। कथा के अंत में आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में खीर -खिचड़ी का वितरण किया गया। मौके पर मुख्य रूप से परेश महतो, मुकेश महतो, भद्रनाथ महतो, विमल सरदार, नंदलाल उरांव,हेमंत महतो, मुकुंद महतो, हेमसागर प्रधान,रैबु गोप, देवा महतो, जगदीश महतो, कुशल उरांव, मनोज महतो, अरविंद उरांव, कृष्णा उरांव, अनिल उरांव, मृत्युंजय उरांव, जगन्नाथ महतो, दिगंबर सरदार, घासीराम महतो, सनत दास, ठुलू महतो, साधुचरण महतो समेत अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे।


