सुविधाओं से वंचित ठेका मजदूरों व झारखंड मजदूर यूनियन ने की बैठक लिए कई निर्णय

भास्कर न्यूज| गुआ बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन, इंटक के महासचिव बी एन चौबे के नेतृत्व में इंटक यूनियन के वार्षिक सम्मेलन बोकारो, सिटी पार्क में 23 फरवरी को हुआ था। जिसमें मुख्य अतिथि सेल, बीएसएल के निदेशक प्रभारी बी के तिवारी, निदेशक एच. आर. राजेश्वरी बनर्जी साथ ही अनेक उच्च अधिकारी शामिल थे। इंटक के महासचिव बी एन चौबे ने अपना विचार साझा करते हुए कहा कि इंटक एक जिम्मेदार श्रमिक संगठन है। बैठक में मजदूरों की समस्याओं, सेल के विकास तथा अन्य उत्पादन वृद्धि से जुडे मामलों पर वार्ता की गई। बोकारो स्टील प्लांट के विभिन्न विभाग से भारी संख्या में कर्मी, प्रशासन और मीडिया कर्मी की उपस्थिति देखी गई। मौके पर बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन, इंटक के अध्यक्ष उपाध्याय जी, कोषाध्यक्ष वाई कामती, झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस से चिरिया के जोनल सेक्रेटरी नवल किशोर सिंह एवं उनके यूनियन के सदस्य, गुआ माइंस के जोनल सेक्रेटरी तूफान घोष, विनोद सिंह, ब्रांच सेक्रेटरी सी के शर्मा, सौरभ केरकेट्टा, कौशिक बेलो, महेश बारला आदि उपस्थित थे। भास्कर न्यूज| चाईबासा कोल्हान प्रमंडल के मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्राइवेट अस्पतालों में नहीं मिल रही है। इससे मरीजो ंको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प सिंहभूम, सरायकेला खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिले के कई प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान योजना से इलाज नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण मरीजों को महंगे इलाज का सामना करना पड़ रहा है और कई लोगों को उपचार के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार प्राइवेट अस्पतालों के आयुष्मान योजना के तहत की गई करार का समय खत्म हो गया है। इसके कारण संबंधित अस्पतालों को सरकारी पैसे नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन अस्पताल इलाज नहीं कर पाने में असमर्थता जता रहे हैं। इधर मरीजों में नाराजगी है। वे इस बात से परेशान हैं कि जब सरकार ने आयुष्मान योजना शुरू की थी, तब उम्मीद थी कि स्वास्थ्य सुविधाएं अधिक सुलभ होंगी, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों के द्वारा इलाज से इंकार किए जाने से यह योजना असफल होती दिखाई दे रही है। मरीजों के पास सरकारी अस्पतालों का विकल्प सीमित होता है और वहां भी भीड़-भाड़ के कारण इलाज में देरी हो रही है। मरीज बताते हैं कि स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस बारे में कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन अब तक इस मुद्दे का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। मरीजों का कहना हैं कि आयुष्मान योजना का उद्देश्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाना था।

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