निकाय चुनाव के बाद राज्य को मिल सकता है 2153 करोड़ रुपए का बकाया

निकायों को केंद्र से 4180 करोड़ की जगह 2027 करोड़ ही मिले झारखंड में नगर निकाय चुनाव के लिए सोमवार को मतदान हो गया। अब 27 फरवरी को मतगणना होगी। इसके साथ ही शहर की सरकार बन जाएगी। चुनाव नहीं होने के कारण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत मिलने वाला फंड पिछले तीन वर्षों से नहीं मिल पाया है। इसका एक बड़ा कारण राज्य में समय पर निकाय चुनाव नहीं होना भी था। इससे शहरी विकास योजनाएं प्रभावित रहीं और कई परियोजनाएं अधर में लटकी रहीं। पिछली बार वर्ष 2018 में नगर निकाय चुनाव हुए थे। निकायों का कार्यकाल 2023 में ही समाप्त हो गया था। चुनाव नहीं होने और राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट तय समय पर नहीं आने के कारण वित्तीय वर्ष 2023-24 से झारखंड को राशि नहीं मिली है। कुल मिलाकर यह राशि 2153 करोड़ रुपए है। उल्लेखनीय है कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत नगर निकायों के लिए केंद्र से झारखंड को कुल 4180 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन अब तक केवल 2027 करोड़ रुपए ही मिले हैं। क्या है मामला: शर्तें पूरी नहीं होने से अटका फंड, अंतरिम रिपोर्ट के बाद मिले 600 करोड़ राज्य को केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसित राशि जारी रखने के लिए दो वर्ष पहले केंद्र सरकार ने निर्धारित शर्तें पूरी करने का निर्देश दिया था। इनमें सभी निकायों के पिछले वर्ष के अंतरिम लेखा (प्रोविजनल अकाउंट) और उससे पूर्व के ऑडिट किए गए खातों को प्रस्तुत करना अनिवार्य था। साथ ही राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाएं और उनके क्रियान्वयन की अनुपालन रिपोर्ट (एटीआर) विधानसभा में पेश करना जरूरी था। केंद्र ने स्पष्ट किया था कि यदि किसी राज्य ने ये शर्तें पूरी नहीं की हैं तो वह मार्च 2024 तक इन्हें पूरा कर एटीआर विधानसभा में प्रस्तुत करे, अन्यथा अनुदान नहीं मिलेगा। उस समय राज्य सरकार यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। पिछले वर्ष राज्य वित्त आयोग के गठन के बाद आयोग ने एक अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके बाद विधानसभा में एटीआर भी पेश की गई। इसी आधार पर ग्राम पंचायतों के लिए राज्य सरकार को करीब 600 करोड़ रुपए जारी किए गए। पैसे के लिए अगला एक माह महत्वपूर्ण 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है। 1 अप्रैल 2026 से 16वें वित्त आयोग की प्रभावी अवधि शुरू हो जाएगी। इसलिए 15वें वित्त आयोग की अवधि का बकाया पैसा 31 मार्च 2026 तक ही केंद्र से जारी हो सकता है। इसे जारी कराने के लिए मांग की पूरी प्रक्रिया जल्द पूरी कर केंद्र सरकार से आग्रह करना होगा। आवश्यक दबाव बनने पर ही यह संभव हो सकेगा। यदि 31 मार्च तक राशि जारी नहीं हुई, तो 16वें वित्त आयोग की अवधि में पूर्व की बकाया राशि मिलना मुश्किल हो सकता है। वित्त आयोग के पैसों से हो सकेंगे ये काम वित्त आयोग से मिलने वाली राशि से शहरी स्थानीय निकायों के विभिन्न कार्य किए जाते हैं और आधारभूत ढांचा मजबूत होता है। जैसे: 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि की स्थिति
नोट: 2023-24 से आगे की राशि शर्तें पूरी नहीं होने के कारण जारी नहीं हो सकी है। पैसे रिलीज होने में लग सकता है एक माह का समय केंद्र से राशि जारी होने की प्रक्रिया में लगभग एक माह का समय लग सकता है, बशर्ते सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी कर ली जाएं।

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