भास्कर संवाददाता| डूंगरपुर राज्य सरकार ने इस बार निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए जारी गाइडलाइन में कई नए प्रावधान लागू किए हैं। अब गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों के अभिभावकों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। इस वर्ष से पेन नंबर का विकल्प भी आवेदन पत्र के साथ जोड़ दिया गया है। यदि किसी अभिभावक की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज या जानकारी गलत या मिथ्या सिद्ध हो जाती है तो ऐसे अभिभावकों को संबंधित विद्यालय में उस विद्यालय से निर्धारित फीस का दोगुनी राशि चुकानी होगी व स्कूल ऐसे अभिभावकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए भी स्वतंत्र रहेगा। आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश में अभिभावक की वार्षिक आय 2.50 लाख या इससे कम निर्धारित की गई है। 2.50 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करवाने के लिए निशुल्क आवेदन के पात्र नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है अभिभावक 4 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के दौरान अभिभावक अधिकतम पांच स्कूलों का ऑप्शन भर सकेंगे। 6 मार्च को लॉटरी होकर वरीयता क्रम का निर्धारण होगा। 6 से 11 मार्च तक अभिभावक विद्यालय चयन क्रम में परिवर्तन करना और 13 मार्च को प्रथम चरण के स्कूलों का आवंटन होगा। 13 से 21 मार्च तक दस्तावेजों का सत्यापन, 27 मार्च को सेकंड राउंड का आवंटन, 27 से 4 अप्रैल तक दस्तावेजों का सत्यापन, 27 से 10 अप्रैल तक परिवेदनाओं का निस्तारण ओर 13 अप्रैल को रिक्त रही सीटों पर तृतीय चरण में आवंटन होगा। गौरतलब है कि शहरी क्षेत्र में संबंधित वार्ड और ग्रामीण क्षेत्र में संबंधित गांव के बच्चों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। बाहर के क्षेत्र के बच्चे किसी भी स्थिति में पात्र नहीं होंगे। आयु प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण-पत्र अनिवार्य है और प्रवेश के बाद जन्म तिथि में कोई बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। ^आरटीई में अभिभावक की ओर से गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश प्रमाणित पाया जाता है तो कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की जाएगी। – हेमंत पंड्या, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, डूंगरपुर


