भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा पुर क्षेत्र की खातेदारी जमीनों के रिकॉर्ड में हेराफेरी की शिकायत और गलत नक्शे की प्रतिलिपि के मामले में तहसीलदार की ओर से गठित कमेटी की जांच में दो पटवारियों को दोषी माना गया है। दोनों को 17 सीसीए का नोटिस देकर आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शिकायतकर्ता पवनकुमार विश्नोई की ओर से की गई शिकायत के संदर्भ में जांच के बाद दो तत्कालीन पटवारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेषाधिकारी (पीसीएस) के पत्र दिनांक 25 सितंबर 2025 के संदर्भ में जिला कलेक्टर कार्यालय को भेजा गया था। इसके बाद भीलवाड़ा एसडीएम के स्तर पर जांच करवाई गई। तहसीलदार की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी में नायब तहसीलदार और कार्यालय कानूनगो को शामिल किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार नक्शा लट्ठा में त्रुटिपूर्ण तरमीम (संशोधन) किए जाने के लिए प्रथम दृष्टया किसी एक कार्मिक की स्पष्ट पहचान संभव नहीं हो सकी। हालांकि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर यह सामने आया कि तत्कालीन पटवारी देवकरण टांक द्वारा ऑनलाइन नक्शे में संशोधन के साथ लट्ठा नक्शे में पेंसिल से तरमीम की गई। इस संशोधन को पुख्ता कराने के लिए तत्कालीन गिरदावर को समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया, जो लापरवाही मानी गई। वहीं तत्कालीन पटवारी गोरंतीबाई मीणा द्वारा ऑनलाइन नक्शे से मिलान किए बिना त्रुटिपूर्ण नक्शे की प्रति जारी की गई। इस कारण कमेटी ने दोनों को लापरवाही का दोषी माना है। इस पर कलेक्टर जसमीतसिंह संधू ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 17 (सीसीए-17) के तहत दोनों पटवारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही प्रस्तावित की। शिकायतकर्ता को भेजी गई सूचना: कलेक्टर कार्यालय ने जांच रिपोर्ट की प्रति शिकायतकर्ता बापूनगर निवासी पवनकुमार विश्नोई को भी भेजी है। इधर, विश्नोई का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की, लेकिन गंभीर शिकायत के चलते इस मामले में 16 सीसी की कार्रवाई होनी चाहिए।


