फेडरेशन ऑफ माइनिंग एसोसिएशन राजस्थान:माइनर खनिज पर मेजर खनन के नियम, 1 हजार खदानों पर संकट

मार्बल और ग्रेनाइट के बाद सबसे अधिक खनन वाले क्वार्ट्ज और फेल्सपार को केंद्र सरकार की ओर से माइनर से मेजर मिनरल घोषित किए जाने का असर उदयपुर-राजसमंद की खदानों पर दिखने लगा है। सोना-चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों पर लागू सख्त नियम अब इन खनिजों पर भी लागू हो गए हैं, जबकि बाजार में इनकी कीमत 200 से 250 रुपए प्रति टन है। सरकार ने वर्ष 2027 तक खदानों को संचालित करने की अनुमति दे रखी है, इसके बाद सभी खदानों के माइनिंग प्लान को इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) से अनुमोदित कराना होगा। फेडरेशन ऑफ माइनिंग एसोसिएशन राजस्थान के सदस्य नाना लाल शार्दूल के अनुसार, आईबीएम नियम लागू होने से प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपए बैंक डिपॉजिट जमा कराने पड़ रहे हैं। 4 हेक्टेयर की लीज के लिए 20 लाख रुपए तक खर्च आ रहा है। हर माह रिटर्न रिपोर्ट देनी अनिवार्य है, जिसमें लेबर, स्टॉक, प्रॉफिट आदि का विवरण देना पड़ता है। प्रत्येक माइंस का ड्रोन सर्वे भी अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि खान विभाग ने पूर्व में फीते से मापकर लीज जारी की थीं। नए नियमों से उदयपुर संभाग की 1000 से अधिक खदानें प्रभावित हो रही हैं और करीब 50 हजार लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। इधर प्रदेश सरकार ने केंद्र को लिखा पत्र राज्य सरकार ने इन खनिजों को माइनर से मेजर मिनरल घोषित किए जाने के बाद 20 जनवरी को केंद्र सरकार को पत्र भेजकर राहत मांगी है। संयुक्त शासन सचिव अरविंद सारस्वत ने खान मंत्रालय को भेजे पत्र में 5 हेक्टेयर तक के पट्टों के माइनिंग प्लान अनुमोदन का अधिकार राज्य को देने, अतिरिक्त वित्तीय आश्वासन से छूट, लंबित पट्टों की अवधि 31 मार्च 2040 तक बढ़ाने और रॉयल्टी प्रति टन तय करने का अनुरोध किया है। साथ ही छोटे पट्टाधारकों को क्लस्टर में एक ही खनि अभियंता रखने की अनुमति देने की मांग की है। भास्कर एक्सपर्ट- पीआर आमेटा, रि. अतिरिक्त खान निदेशक मेजर मिनरल्स के लिए 4 हेक्टेयर क्षेत्र जरूरी मेजर मिनरल्स में लीज के लिए न्यूनतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र आवश्यक है, जबकि माइनर में 1 हेक्टेयर में भी लीज बन जाती थी। फेल्सपार सहित अन्य खनिज छोटे-छोटे पॉकेट में पाए जाते हैं। उदयपुर में कई स्थानों पर एक-दो बीघा जैसे छोटे हिस्सों में यह खनिज उपलब्ध है। पहले माइनर में लीज प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली थी, अब फाइल लगाने के बाद नीलामी अनिवार्य है। बोलीदाता जमीन मालिक की सहमति के बाद ही खनन कर सकता है। इससे कई लोग लीज नहीं ले पा रहे या अवैध खनन की ओर बढ़ रहे हैं।

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