होम स्टे योजना लागू:पर्यटकों की सुरक्षा और हाइजीन का रखना होगा विशेष ध्यान, फायर एनओसी लेना अनिवार्य

राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे (पेइंग गेस्ट हाउस) योजना-2026 लागू कर दी है। यह राजस्थान टूरिज्म ट्रेड 2010 की धारा 7 के तहत जारी की गई है, जो तत्काल लागू होगी। इस योजना में होम स्टे पर्यटकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके तहत होम स्टे संचालकों को कमरों में फायर सेफ्टी के उपकरण लगाने होंगे। इसके अलावा हाइजीन का ध्यान रखना होगा। प्रदेश के कई पर्यटन शहरों में गली-गली के अंदर होम स्टे बने हुए हैं। उदयपुर जिले में ही वर्तमान में करीब 200 होम स्टे संचालित हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर के पास फायर सुरक्षा के उपकरण नहीं हैं। नगर निगम के फायर ऑफिसर शिवराम मीणा ने बताया कि अब होम स्टे में भी फायर एनओसी लेना अनिवार्य होगी। यह 3 साल के लिए मिलेगी। इसके तहत 15 मीटर ऊंची बिल्डिंग में फायर उपकरण लगाना होंगे। इन उपकरणों को लगाने का खर्च करीब डेढ़ से दो लाख रुपए आएगा। नई गाइडलाइन… पंजीयन और वर्गीकरण भी जरूरी अब होम स्टे संचालकों को पंजीयन और वर्गीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा। अस्थायी पंजीयन के बाद तीन महीने में संबंधित प्राधिकृत अधिकारी निरीक्षण करेंगे। सभी मानकों की पूर्ति होने पर स्थायी पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसकी वैधता दो वर्ष रहेगी। इसके नवीनीकरण के लिए समाप्ति अवधि से एक से तीन महीने पहले आवेदन करना होगा। 5 रूम को होम स्टे का लाइसेंस मिलता था पहले 5 रूम को होम स्टे का लाइसेंस मिलता था। इसमें बेड संख्या निर्धारित नहीं थी। नई गाइडलाइन के अनुसार एक होम स्टे में न्यूनतम एक और अधिकतम 8 कमरे किराए पर दिए जा सकेंगे। कुल बेड 24 से अधिक नहीं होंगे। प्रत्येक कमरे में अटैच बाथरूम, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा, पानी-बिजली की व्यवस्था और उचित फर्नीचर अनिवार्य होगा। दो श्रेणियों में बांटा योजना में होम स्टे को सिल्वर और गोल्ड श्रेणी में बांटा गया है। सिल्वर के लिए 1000 और गोल्ड के लिए 2000 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। शुल्क ई-चालान के माध्यम से पर्यटन विभाग के पक्ष में जमा होगा। आवेदन मिलने के बाद सात दिन में अस्थायी पंजीयन जारी किया जाएगा, जो छह महीने के लिए मान्य होगा। बता दें कि अभी 10 कमरों की बजट होटल में फायर एनओसी लेने का नियम है।

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