CSMCL ओवरटाइम भुगतान घोटाला…अनवर ढेबर गिरफ्तार:कमीशन-मामले में EOW की कार्रवाई, 100 करोड़ से ज्यादा किया पेमेंट;5 दिन पहले नवीन तोमर को किया था अरेस्ट

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद अनवर ढेबर की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में ओवरटाइम भुगतान के नाम पर हुए घोटाले में उन्हें गिरफ्तार कर कस्टोडियल रिमांड पर लिया है। इस मामले में 19 फरवरी को EOW ने आबकारी विभाग के आबकारी उपायुक्त नवीन प्रताप सिंह तोमर को गिरफ्तार कर कस्टोडियल रिमांड पर लिया था। अब जांच टीम अनवर ढेबर और नवीन प्रताप सिंह तोमर को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। जांच में खुलासा हुआ है कि साल 2019-20 से 2023-24 के बीच CSMCL में मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए ओवरटाइम भत्ते के नाम पर बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया। करीब 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ओवरटाइम के नाम पर जारी हुई। नियमानुसार यह रकम शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान के रूप में मिलनी थी। एजेंसियों को बिल के जरिए भुगतान किया जाता था ताकि वे कर्मचारियों को राशि वितरित करें। मैनपावर एजेंसियों के जरिए अवैध लेनदेन जांच में सामने आया कि CSMCL के अधिकारियों की मिलीभगत से संबद्ध मैनपावर एजेंसियों को षड्यंत्रपूर्वक अवैध भुगतान किए गए। आरोप है कि इन भुगतानों का एक तय हिस्सा कमीशन के रूप में रिश्वत की तरह लिया जाता था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जब्त 28.8 लाख रुपए की राशि मैनपावर एजेंसी ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी बताई गई। यह रकम कथित तौर पर तत्कालीन उप महाप्रबंधक CSMCL नवीन प्रताप सिंह तोमर तक पहुंचाई जानी थी। अनवर ढेबर की भूमिका सामने आई अनवर ढेबर पर आरोप है कि शराब दुकानों में मैनपावर सप्लाई और प्लेसमेंट एजेंसियों के साथ मिलकर ओवरटाइम भत्ता देने के नाम पर करोड़ों रुपए का हेरफेर किया गया। ED की शिकायत के बाद EOW ने आबकारी विभाग के अधिकारियों और शराब कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। ED की कार्रवाई के बाद दर्ज हुई FIR मामले की शुरुआत 29 सितंबर 2023 को हुई, जब ED ने तीन व्यक्तियों से करीब 28 लाख रुपए नकद जब्त किए। इस संबंध में राज्य शासन को सूचना भेजी गई। इसके आधार पर EOW ने एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। इसी जांच के दौरान आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त नवीन तोमर की गिरफ्तारी हुई। पूछताछ में अनवर ढेबर की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ नया केस दर्ज किया गया। कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा पैसा जांच में पाया गया कि अधिकांश मामलों में ओवरटाइम की राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। एजेंसियों के जरिए यह रकम अवैध कमीशन के रूप में निकाली गई और बांटी गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कमीशन का बड़ा हिस्सा अनवर ढेबर सहित कुछ आबकारी अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था। कोर्ट में पेशी के बाद पुलिस रिमांड 23 फरवरी को जेल में बंद अनवर ढेबर को रायपुर स्थित विशेष न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच जारी है। संभावना है कि शराब कारोबार से जुड़े अन्य लोगों और आबकारी अधिकारियों पर भी EOW की कार्रवाई तेज हो सकती है। अब जानिए छत्तीसगढ़ में कैसे हुआ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 32 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई। B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई। खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी। शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी। डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है। C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में विभाजित किया। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा। एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा। EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है। ……………………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ शराब घोटाला…नवीन तोमर गिरफ्तार: पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर 28 फरवरी तक EOW रिमांड में, 27 लाख लेन-देन मामले में होगी पूछताछ छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में आबकारी विभाग के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर नवीन कुमार तोमर को कथित 27 लाख रुपए के लेन-देन के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने नवीन कुमार तोमर को गुरुवार को स्पेशल कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद, कोर्ट ने उन्हें 28 फरवरी तक EOW की कस्टडी में भेज दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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