राजनांदगांव जिले में होली के त्योहार के लिए इस बार एक अनोखी पहल की जा रही है। यहां की महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य पलाश के फूलों से प्राकृतिक गुलाल तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही, वे पहली बार महुआ के पौष्टिक लड्डू भी बना रही हैं, जिससे त्योहार की मिठास बढ़ेगी। यह पहल मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष फूलबासन यादव के मार्गदर्शन में की जा रही है। समूह द्वारा तैयार किए गए महुआ के लड्डू अब तक जिले और प्रदेश में 1 लाख रुपए से अधिक में बिक चुके हैं। भिलाई आईआईटी के लगभग 2200 विद्यार्थियों और प्रोफेसरों ने भी इन लड्डुओं का स्वाद चखा और उनकी सराहना की है। रसायनों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जंगल से पलाश के फूल एकत्रित कर सुखाए जाते हैं और फिर मशीनों के जरिए पाउडर बनाकर हर्बल गुलाल बनाया जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर हैं महुआ के लड्डू इस अभियान के प्रमुख शिव कुमार देवांगन ने बताया कि महुआ के लड्डू न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि शरीर के लिए बेहद लाभकारी और पोषक तत्वों से भरपूर हैं। इन लड्डुओं को और बेहतर बनाने के लिए इनमें काजू, किशमिश, तिल, कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज जैसी सामग्री मिलाई गई है। ये उत्पाद समूह के कार्यालय के अलावा ग्राम चवेली में भी उपलब्ध हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी इनका प्रचार-प्रसार जोर-शोर से किया जा रहा है। समूह की सैकड़ों महिलाएं पिछले एक महीने से प्राकृतिक रंग बनाने में जुटी हैं। इसका उद्देश्य बाजार में बिकने वाले रसायनों युक्त रंगों से त्वचा, आंखों और बालों को होने वाले नुकसान से बचाना है। महिलाओं को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।


