देशभर के जल मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के 6 दिन बाद मंगलवार को झीलों में आकोदड़ा बांध से आवक बंद कर दी गई। पिछोला और फतहसागर झील को 11-11 फीट तक भरना था, पर क्रमश: 10.5 व 10.1 फीट तक ही भरा गया। फिलहाल पिछोला अपनी 11 फीट की क्षमता के मुकाबले 7 इंच और फतहसागर 13 फीट की क्षमता के मुकाबले 2.11 फीट तक खाली है। बता दें कि 17 से 19 फरवरी तक शहर में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय का राष्ट्रीय सम्मेलन था। इसमें कई राज्यों के जल मंत्रियों के साथ प्रशासनिक अफसर शामिल हुए। इन्हें लेकसिटी का जल प्रबंधन व संरक्षण दिखाना था। ऐसे में पहली बार फरवरी माह में बांध के गेट खोलकर झीलों को 11-11 फीट तक भरना तय किया गया। 3 बांधों से भरनी थीं, एक का पानी भी पूरा नहीं लाए 13 फरवरी को जब आकोदड़ा का गेट खोला तो पिछोला 8.6, फतहसागर 9 फीट थी। 13 दिन में क्रमश: 1.11 फीट व 1.1 फीट पानी बढ़ा। आकोदड़ा 54 फीट पर था, अब 24 फीट है। इसे भी लाते तो झीलें 11-11 फीट तक भर सकती थीं। अलसीगढ़ व मादड़ी से भी पानी लाना प्रस्तावित था। मार्च में लाते हैं पानी, इस बार फरवरी में लाए, फिर लाने पर वाष्पीकरण होगा
जल संसाधन अधिकारियों के अनुसार अगले कुछ दिनों तक दोनों झीलों से शहर की पेयजल सप्लाई सुचारू रहेगी। जरूरत होने पर मार्च के आखिरी दिनों में फिर से बांधों के गेट खोले जा सकते हैं। बता दें कि हर बार गर्मी की दस्तक के साथ मार्च के आखिरी दिनों में ही बांधों से झीलों को लबालब किया जाता रहा है। इसके पीछे दो मकसद रहते हैं। एक तो गणगौर उत्सव में पर्यटकों को झीलें लबालब दिखती हैं। दूसरा- शहरी जलापूर्ति का क्रम भी बना रहता है। अब दोबारा पानी लाएंगे तो गर्मी में फिर वाष्पीकरण होगा। दोनों ही झीलों से शहर की करीब 1.75 लाख आबादी की प्यास रोज बुझाई जाती है।


