पुजारी साधु का इलाज कराने अस्पताल में अपना आधार दिया:मौत हुई तो उसी को सौंपा उसके ही नाम का शव, तीन दिन बाद परिजनों को सौंपा शव

बीमार साधु का इलाज कराने के लिए अस्पताल में अपना आधार कार्ड देने वाले पुजारी को महंगा पड़ गया। जब साधु की मौत हो गई तो उसको उसी के नाम का शव सौंप दिया गया। मामला धनूरी थाना इलाके के कांट गांव का है। गांव के बालाजी मंदिर के पुजारी चतरूराम मीणा उर्फ चेतन गिरी के पास करीब 15 दिन पहले 7 फरवरी को उसका परिचित एक साधु आकर रुका था। वह नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी कुलदीप था। उसकी 12 फरवरी को तबीयत बिगड़ गई। तब चेतनगिरी ने उसे बिसाऊ में डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। तब वह उसे लेकर झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल पहुंचा। यहां पर आउटडोर में रजिस्ट्रेशन के लिए बीमार व्यक्ति का आधार कार्ड मांगा। चेतनगिरी के पास साधु कुलदीप की पहचान का कोई दस्तावेज नहीं था, इसलिए उसने अपना आधार कार्ड देकर अपने नाम से ही रजिस्ट्रेशन करवा – दिया और इलाज शुरू हो गया। 22 – फरवरी को बीडीके अस्पताल में उसकी तबीयत ज्यादा खराब हुई तो डॉक्टरों ने उसे जयपुर एसएमएस के लिए रेफर कर दिया। जयपुर में उसी रात इलाज के दौरान साधु की मौत हो गई। वहां से वह शव लेकर अपने गांव बिरमी आ गया। यहां अंतिम संस्कार करना चाहा तो ग्रामीणों ने विरोध जता दिया। पुलिस ने उसके दस्तावेज मांगे तो पता चला कि रिकॉर्ड में चतरू का निधन हो गया, जबकि वह तो जिंदा है। हालांकि बाद में मृतक की शिनाख्त होने पर उसके दस्तावेज मंगवा कर पोस्टमार्टम किया तब चतरू ने राहत की सांस ली। साधु की जेब में मिली पर्ची में लिखे मोबाइल नंबरों से हुई शिनाख्त थानाधिकारी रामनारायण चोयल ने बताया कि पुलिस ने साधु के शव की तलाशी ली तो उसकी जेब में एक पर्ची मिली, जिस पर मोबाइल नंबर लिखे हुए थे। पुलिस ने उन नंबरों पर कॉल कर इस घटनाक्रम की जानकारी दी तो पता चला कि साधु पपरावता नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी कुलदीप (42) पुत्र मुरारीलाल ब्राह्मण था। तब वहां की पुलिस की मदद से साधु कुलदीप के भाई मदनगोपाल को सूचना दी गई। मदनगोपाल मंगलवार को झुंझुनूं पहुंचा। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम करा कर उसे सुपुर्द कर दिया गया। शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुजारी चेतनगिरी साधु कुलदीप का शव लेकर 23 फरवरी को अपने गांव बिरमी पहुंचा। वहां वह उसकी अंत्येष्टि करना चाह रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध कर दिया और साधु का अंतिम संस्कार नहीं करने दिया। तब वह साधु का शव लेकर उसके गांव नजफगढ़ (दिल्ली) चला गया। लेकिन वह उसका घर नहीं जानता था। इसलिए परेशान होकर शव लेकर बालाजी मंदिर कांट लौट आया और उसने 24 फरवरी को धनूरी पुलिस को सूचना दी। तब पुलिस ने सोमवार को चेतनगिरी के कब्जे से शव लेकर बीडीके अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। 15 साल पहले गुरुग्राम के आश्रम में हुई थी जान पहचान चेतनगिरी व कुलदीप की 15 साल पहले गुरुग्राम के एक आश्रम में जान पहचान हुई थी। चतरू आश्रम में रहता था, जबकि कुलदीप वहां आता जाता रहता था। इस कारण दोनों में मित्रता हो गई। वहां से चतरू कांट आ गया। तब भी कुलदीप से बातचीत होती रहती थी। कुलदीप पहले भी कई बार आ चुका था। इस बार वह 7 फरवरी को आया था। चेतनगिरी 9 फरवरी को प्रयागराज गया। 15 फरवरी को वापस आया तो कुलदीप सर्दी जुकाम से पीड़ित मिला। पुजारी बोला- इंसानियत का फर्ज निभाने के लिए अपना आधार कार्ड देकर भर्ती कराया था चतरूराम उर्फ चेतनगिरी ने बताया कि मेरी कुलदीप से 15 साल से मित्रता थी। मैं उसके गांव का नाम जानता था। उसका घर नहीं देखा था। इस बार वह मेरे पास आया तो उसकी तबीयत खराब थी। मैने उसे बिसाऊ व झुंझुनूं के डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन सुधार नहीं हुआ तो शनिवार को उसे झुंझुनूं के खेतान अस्पताल लेकर गया, वहां डॉक्टरों ने उसका आधार कार्ड मांगा, लेकिन उसके पास नहीं था। तबीयत ज्यादा खराब थी। इसलिए मैने मानवता के नाते अपने आधार कार्ड से पर्ची बनवाकर डॉक्टर को दिखाया। इसके बाद कुलदीप को जयपुर रेफर कर दिया, वहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। रिकॉर्ड में मृतक की जगह मेरा नाम दर्ज हो गया। इसलिए परेशान हूं। पीएमओ राजवीर राव ने बताया कि मृतक चतरू न होकर नजफगढ़ का कुलदीप था। उसके परिजनों से दस्तावेज लिए हैं। अब कुलदीप के दस्तावेज के आधार पर ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराएंगे।

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