दिल्ली राेड कूकस के पास सदाशिव ज्याेतिर्लिंगेश्वर महादेव मंदिर है, जिसका अभी पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। यहां पर वर्ष-2003 में ढाई फीट ऊंचा और 5 टन वजनी शिवलिंग स्थापित किया गया था, जाे अष्टधातु, नवरत्न की भस्म, 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष का बना हुआ है। यह शिवलिंग 1.50 फीट भू-गर्भ में भी है। इस शिवलिंग में एक साथ 12 ज्याेतिर्लिंग के दर्शन हैं। मान्यता है कि जाे शिव भक्त देश में जगह-जगह विराजमान ज्याेतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर सकते, वाे यहां पर सदाशिव ज्याेतिर्लिंगेश्वर का जलाभिषेक कर सभी द्वादशा शिवलिंग की सेवा का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। ग्रहाें से बचाव के लिए भी भक्त यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। सदाशिव ज्याेतिर्लिगेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सचिव विष्णु नाटाणी ने बताया कि ग्वालियर माेती झील में मूर्तिकार प्रभात राय ने दाे साल में सांचा तैयार किया था और उसके बाद यह शिवलिंग बनाया गया। शिवलिंग प्राण-प्रतिष्ठा के दाैरान द्वादश ज्याेतिर्लिंग की रज भी लाई गई थी। 6 माह में पूरा बन जाएगा मंदिर शिवजी के जलाभिषेक के बाद जल व्यर्थ नहीं जाता यहां पर शिवजी के जलाभिषेक के बाद जल को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता है। यह पानी जलहरी से होता हुआ पाइपलाइन के माध्यम से शक्कर कुई में जाता है। इसी के पास बोरिंग भी हैं पानी रिचार्ज होकर पीने योग्य हो जाता है। सदाशिव ज्योतिर्लिंगेश्वर महादेव मंदिर में वाटर हार्वेस्टिंग का श्रीगणेश पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने किया था। जल संरक्षण के लिए भू-जल विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक पीएन मिश्रा डॉ. विनय भारद्वाज की टीम ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया था।


