धौलपुर के प्रसिद्ध सैंपऊ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर में बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं। मंदिर में लक्खी मेले का आयोजन किया गया, जहां लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचे। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर दूध, पंचगव्य, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया गया। मेले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सैंपऊ महादेव मंदिर धौलपुर जिले से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर मौर्य कालीन स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। इसे राम रामेश्वर भी कहा जाता है। यह मंदिर महाराजा भगवंत सिंह और उनके संरक्षक कन्हैयालाल राजधर की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग लगभग 700 वर्ष पुराना है। संवत 1305 में श्याम रतन पुरी को यहां झाड़ियों में दबा शिवलिंग मिला था। एक रोचक कथा के अनुसार, खुदाई के दौरान खंडित हुए शिवलिंग को मिट्टी से दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह मिट्टी में नहीं दबा। आठ फीट तक मिट्टी का ढेर लगाने के बाद भी शिवलिंग दिखता रहा। धौलपुर शहर के ऐतिहासिक चोपड़ा महादेव में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। यह मंदिर रियासतकाल में महाराजा द्वारा बनवाया गया था। कहा जाता है कि महाराजा प्रतिदिन यहां दर्शन कर अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते थे। सैंपऊ महादेव मंदिर और चोपड़ा महादेव के साथ बसेड़ी के भूतेश्वर महादेव मंदिर और अचलेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भी उमड़ी हुई है दूर दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु ऐतिहासिक महादेव मंदिर पर राजस्थान समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा के श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। वही हरिद्वार, सोरों एवं कर्णवास से कांवड़िये गंगाजल लेकर भगवान शंकर को अर्पित कर रहे हैं।


