करौली के सपोटरा में स्थित रामठरा का शिव मंदिर अपनी अद्भुत महिमा के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। मंदिर का इतिहास 16वीं शताब्दी का है। जयपुर के महाराजा ईश्वरी सिंह की पत्नी और रामठरा ठिकाने की राजकुमारी ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। रियासत काल में इसे निजी संपत्ति के रूप में स्थापित किया गया था। अरावली पर्वतमालाओं के बीच स्थित इस मंदिर में शिव-पार्वती की भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं। सावन के महीने में मंदिर में विशेष रौनक देखने को मिलती है। श्रद्धालु बेलपत्र, पुष्प, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करते हैं। इस दौरान विशेष अनुष्ठान और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। महाशिवरात्रि पर यहां विशेष जागरण कार्यक्रम होता है। मंदिर के श्रद्धालु शिवकुमार बजाज और चंद्रप्रकाश गर्ग के अनुसार, शिवलिंग का रंग बदलने की घटना रोज होती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां की पूजा-अर्चना से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


