जिले का एक मात्र आकांक्षी प्रखंड है डुमरी, प्रखंड के करनी स्थित राजकीय कृत उवि सुवाली के नवनिर्मित विद्यालय भवन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 72 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन को विभाग को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य को निम्न स्तर का बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार भवन का निर्माण कार्य पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि अंदर कई खामियां साफ नजर आ रही हैं। विद्यालय परिसर में कई जगहों पर फर्श टूटे हुए हैं और दीवारों पर पुट्टी-प्लास्टर का काम अधूरा है। शौचालय में लगा बेसिन बेकार पड़ा हुआ है व अन्य हिस्सों में भी टूट-फूट और अधूरे कार्य स्पष्ट दिखाई देते हैं। ऐसे में भवन की गुणवत्ता और निर्माण में बरती गई लापरवाही को लेकर सवाल उठना स्वभाविक है। नवनिर्मित विद्यालय भवन और नए भवन का फर्स टूटा-फूटा। पंचायत के मुखिया संजय उत्सव ने भी स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक भवन के अंदर के सभी टूटे-फूटे और अधूरे कार्य पूरे नहीं कराए जाते, तब तक हैंडओवर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्दबाजी में अधूरे भवन को स्वीकार किया गया तो भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिसका खामियाजा छात्रों और विद्यालय को भुगतना पड़ेगा। निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं कराया गया : प्रधानाध्यापक इधर विभाग के कनीय अभियंता जयंत उरांव ने स्वीकार किया कि निर्माण कार्य में कमियां पाई गई हैं। बताया कि संवेदक को कई बार पत्राचार के माध्यम से टूटे फर्श, खराब बेसिन व अन्य खामियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि अब तक संतोषजनक सुधार नहीं किया गया है। आश्वासन दिया कि कमियों को दुरुस्त कराने की कार्रवाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रवीट टोप्पो ने बताया कि संवेदक द्वारा निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि भवन के अंदर कई स्थानों पर दीवारें और फर्श क्षतिग्रस्त हैं। इसके बावजूद अधूरे भवन को विभाग को हैंडओवर करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सभी कार्य पूर्ण नहीं हो जाते और खामियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक भवन को स्वीकार करना विद्यालय हित में नहीं होगा।


