झांसेबाज और ठगों ने संभाग के सबसे बड़े एमबी हॉस्पिटल को अपना नया ठिकाना बना लिया है। बुधवार को यहां ब्लड के नाम पर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया। पैर के ऑपरेशन के लिए भर्ती मरीज के पिता से एक बदमाश ब्लड दिलाने का झांसा देकर 10 हजार रुपए लेकर भाग गया। खास बात यह है कि मरीज को ब्लड की जरूरत ही नहीं थी। पैसे लेने से भागने तक बदमाश सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। एमबी इस तरह की ठगी का यह पहला मामला नहीं है। यहां पिछले 7 माह में ऐसे ही तीन मामले सामने आ चुके हैं। खेरोदा निवासी कृष्णा मेघवाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। डेढ़ माह पहले यूनिवर्सिटी रोड पर एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी थी। जिससे उनका पैर टूट गया। तब डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर पैर में लोहे की रॉड डाली थी। रॉड निकालने के लिए मंगलवार को उन्हें एमबी हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के वार्ड-1 में भर्ती कराया गया। बुधवार को ऑपरेशन होना था। इसलिए पिता कमलेश मेघवाल भी साथ थे। सुबह 10:20 बजे एक युवक वार्ड में आया। उसने एक पर्ची बताते हुए मरीज और पिता का नाम पूछा। बताया कि उसे डॉक्टर ने भेजा है। फिर ऑपरेशन के लिए ब्लड दिलाने के लिए पिता को साथ चलने को कहा। ब्लड बैंक में जाकर युवक ने 3 यूनिट ब्लड दिलाने के बदले 10 हजार रुपए की मांग की। फिर सीसीटीवी से बचने के लिए उन्हें सीढ़ियों के नीचे ले गया और राशि ले ली। फिर उन्हें आधार कार्ड लेने के लिए वार्ड में भेजा। वह वापस आए तो बदमाश वहां नहीं मिला। उन्होंने ब्लड बैंक में जाकर बदमाश के बारे में पता किया, लेकिन जानकारी नहीं मिली। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारी को घटना बताकर 3 यूनिट ब्लड मांगा। कर्मचारी ने बिना पर्ची के ब्लड देने से इनकार कर दिया। बाद में पता चला कि उनके बेटे को ब्लड की जरूरत ही नहीं थी। न ही डॉक्टर ने उनसे ब्लड मांगा था। ठगी का पता चलते ही कमलेश मेघवाल ने हाथीपोल थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस बदमाश की तलाश कर रही है। सवाल : बदमाश को ऑपरेशन की जानकारी कहां से मिली? बड़ा सवाल यह है कि एमबी हॉस्पिटल में हजारों मरीज हैं। ऐसे में बदमाश को मरीज कृष्णा के ऑपरेशन की जानकारी कैसे मिली? यह जानकारी डॉक्टर या वार्ड नर्सिंग स्टाफ को रहती है। इसी का फायदा उठाकर बदमाश ऑपरेशन से पहले ठगी कर भाग गया। ऐसे में हॉस्पिटल स्टाफ के भी वारदात में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है पहले भी हो चुकी ठगी की वारदातें : बिछड़ी निवासी मनभर टांक (75) पिछले साल 15 जुलाई को एमबी में इलाज कराने आई थी। दोपहर में कार्डियोलॉजी विभाग के बाहर बैठी थीं। तभी दो युवकों ने उनकी आधा-आधा तोले की सोने की चेन और अंगूठी उतार दी। फिर वृद्धा को पर्स में रखने को कहा। कुछ देर बाद उन्होंने पर्स चेक किया तो उसमें जेवर, आधार कार्ड और 500 रुपए नहीं मिले।


