ग्वालियर रेलवे स्टेशन:पुनर्विकास की समय सीमा खत्म होने में 14 दिन शेष और 55% काम बकाया

350 घंटे में स्टेशन का सिर्फ 45% काम, अब 411 घंटे का ब्लॉक और मांगा, यानी 2 साल और गिरते-रेंगते रहेंगे यात्री क्योंकि… रेल प्रशासन ने साफ कहा कि 411 घंटे ब्लॉक कम से कम दो साल में ही मिल पाएगा ग्वालियर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य धीमी गति से चल रहा है। 535 करोड़ की लागत से दिसंबर 2024 तक काम पूरा होना था, लेकिन अब तक केवल 45% ही कार्य हुआ है। 14 दिन बाद डेडलाइन खत्म हो जाएगी, लेकिन प्लेटफार्म, रूफटॉप, और अन्य निर्माण अधूरे हैं। रेल प्रशासन ने दो साल के दौरान लगभग 350 घंटे का ब्लॉक केपीसी कंपनी को दिया है। अब कंपनी ने रेलवे को प्रस्ताव भेजा है कि 25 अप्रैल तक प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर चार तक स्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए उसे 411 घंटे ब्लॉक की जरूरत है। इससे यह तय माना जा रहा है कि पुनर्विकास का काम पूरा होने में कम से कम दो साल से ज्यादा का वक्त अभी और लगेगा। तब तक यात्री रेंगने के लिए मजबूर होते रहेंगे। स्टेशन पर रोजाना 60 हजार यात्री ट्रेनों में सफर करते हैं, लेकिन काम के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्लेटफार्म पर बैठने की जगह नहीं है। नया फुटओवर ब्रिज तैयार होने के बावजूद एस्केलेटर चालू नहीं है, और स्टेशन के पोर्च तक वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। यही नहीं निर्माण कार्य के दौरान प्लेटफार्म से गिरकर ट्रेन की चपेट में आए चार यात्रियों की मौत हो चुकी है जबकि कई घायल भी हुए हैं। हालांकि रेलवे इसे मानने से इनकार करता है। निर्माण के कारण स्टेशन पर जगह कम बची है, ट्रेन पकड़ते समय 4 यात्रियों की गिरने से मौत हो चुकी है ये हैं 4 वजह… काम में देरी होने की यात्री सुविधाओं में भी हो रही दिक्कतें अफसरों के लिए बन रहा टॉवर भी अधूरा प्लेटफार्म नंबर एक के बाहर 7 मंजिला दो रिहायशी टॉवर जबकि चार नंबर के बाहर लोकोशेड के पास 7 मंजिला टॉवर अफसरों के निवास के लिए बन रहा है। यह भी अभी अधूरे हैं जिनको पूरा करने में अभी 6 माह का वक्त लगेगा। प्रशासन का जवाब- तय समय में काम पूरा नहीं होने पर कार्रवाई करेंगे
^कंपनी को शर्तों के तहत ब्लॉक दिया जा रहा है। अगर तय समय में काम पूरा नहीं होता, तो जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन प्राथमिकता में हैं, इसलिए ब्लॉक नियमों के तहत ही दिए जाएंगे।
-शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्यम रेलवे

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