परमार-दंपती सुसाइड और भारत जोड़ो यात्रा का कनेक्शन:ईडी का केस गुल्लक टीम और राहुल की मुलाकात से पहले का, रेड दो साल बाद

आष्टा के कारोबारी मनोज परमार और उनकी पत्नी के सुसाइड की चर्चा देशभर में है। उनके सुसाइड के लिए प्रवर्तन निदेशालय(ED) पर आरोप लग रहे हैं। परिजन और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ईडी अफसरों की प्रताड़ना के चलते मनोज परमार ने सुसाइड जैसा कदम उठाया। कांग्रेस नेताओं ने ये भी आरोप लगाया कि परमार के बच्चों की गुल्लक टीम ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी से मुलाकात की थी, उसी की वजह से ईडी ने छापामार कार्रवाई की। दैनिक भास्कर ने जब भारत जोड़ो यात्रा और परमार के सुसाइड के कनेक्शन की पड़ताल की तो 4 बातें पता चली.. भास्कर ने परमार दंपती के सुसाइड का रहस्य समझने के लिए उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के दस्तावेज, कोर्ट के फैसले, सीबीआई की एफआईआर, ईडी के अधिकारियों से बात की। आष्टा और उसके पैतृक गांव पहुंचकर चीजों को समझा। पढ़िए रिपोर्ट…. भारत जोड़ो यात्रा से 8 महीने पहले ईडी ने केस दर्ज किया था
मनोज परमार किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का सदस्य नहीं था, बावजूद उसके उसने अपने कथित सुसाइड नोट में लिखा कि राहुल जी मेरे बच्चों का ख्याल रखना। दरअसल, नवंबर 2022 में जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मध्यप्रदेश से होकर गुजरी थी तब मनोज परमार के तीनों बच्चों ने राहुल गांधी को गुल्लक भेंट की थी। राहुल से उनकी ये मुलाकात 27 नवंबर 2022 को हुई थी, जबकि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 31 मार्च 2022 को ही परमार के खिलाफ केस दर्ज किया था। ईडी ने ये केस भोपाल सीबीआई की एफआईआर नंबर RC0082017A0013KS के आधार पर दर्ज किया था। ईडी के अधिकारी बोले- जांच के हिसाब से तय करते हैं कब छापा मारना है
परमार पर आरोप था उसने पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी के साथ मिलकर 18 लोगों के नाम से बोगस लोन सेंक्शन कराया और 6 करोड़ रु. की हेराफेरी की। सीबीआई ने इस मामले की जांच के बाद परमार के खिलाफ केस दर्ज किया था और साल 2018 में चार्जशीट पेश कर दी थी। स्पेशल सीबीआई कोर्ट में ये केस अभी चल रहा है। भास्कर ने जब ईडी के अधिकारियों से पूछा कि साल 2022 में केस दर्ज किया और रेड ढाई साल बाद क्यों की गई? तो अधिकारियों ने तर्क दिया कि सीबीआई की चार्जशीट में पैसों की हेराफेरी के सबूत थे। इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया था। जहां तक रेड का सवाल है, तो ये हमारे इन्वेस्टिगेशन अधिकारी अपने जांच के हिसाब से तय करते हैं कब क्या करना है। मनोज परमार के चचेरे भाई राजेंद्र परमार का ये भी कहना है कि 5 दिसंबर को छापामार कार्रवाई के बाद मनोज परमार को 9 दिसंबर को पूछताछ के लिए दफ्तर बुलाया गया था। परमार ने अपने भाई के जरिए ईडी को पत्र भेजा था। इसमें खराब सेहत का हवाला देते हुए 15 दिन की मोहलत मांगी थी। ईडी के पूर्व अफसर बोले- हर जब्ती का पंचनामा बनता है
ईडी की छापेमारी, परमार दंपती के सुसाइड और कथित लेटर पर हमने ईडी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सतेंद्र सिंह सिंह से बात की। उन्होंने उल्टा सवाल किया कि क्या जिस लेटर को सुसाइड लेटर बताया जा रहा है, वो वेरिफाइड है? उनका कहना है कि अभी तो ये भी जांच का विषय है कि ये लेटर किसने लिखा? कैसे वहां आया? सतेंद्र सिंह कहते हैं कि इस कथित लेटर में दो सबसे अहम सवाल हैं। पहला -ऑफिसर ने धमकी दी कि आप बीजेपी जॉइन कर लीजिए और दूसरा ईडी अफसर 10 लाख रुपए कैश और ज्वेलरी ले गए, जिसका पंचनामे में जिक्र नहीं है। पहले ये समझना होगा कि हर केस में ईडी को सर्च की जरूरत नहीं होती। जहां जरूरी लगता है, वहीं सर्च होती है। जब तक जांच अधिकारी को ऐसी फाइंडिंग नहीं मिलती कि छापेमारी में कुछ अहम सबूत मिल सकते हैं, तब तक सर्च नहीं होती। सतेंद्र सिंह कहते हैं कि कोई अफसर ऐसा नहीं कहता कि आप कोई पॉलिटिकल पार्टी जॉइन कर लो। नोट में कंधे पर पैर रखने की जो बाल लिखी है वो भी गले नहीं उतरती। परिवार बोला- मनोज कह रहा था अब जीने का मन नहीं है
परिवार का कहना है कि एक ही मामले में पुलिस, सीबीआई और ईडी की कार्रवाई से मनोज टूट गया था। मनोज के पैतृक गांव हरसपुर में भास्कर की टीम मनोज के चचेरे भाई राजेश परमार से मिली। राजेश ने कहा कि ईडी ने छापे के दौरान उसके बच्चों के सामने उसकी जो बेइज्जती की, उससे वह टूट गया। उसके सामने उसके बच्चों से मारपीट हुई थी। मनोज के 16 साल के बेटे जतिन कहते हैं कि 5 दिसंबर को मैं सुबह 5.30 बजे वर्क आउट के लिए जिम गया था। करीब 7.30 बजे लौटा तो घर में ईडी की टीम थी। पापा एक हाल में थे, घर के बाकी लोग दूसरे कमरे में थे। उस हाल से मारपीट की आवाज आ रही थी। मुझे भी एक कमरे में बंद कर दिया। मैंने देखा कि पापा की कॉलर पकड़कर उनके कंधों पर पैर रखकर उनसे बदतमीजी की जा रही थी। गाली गलौज की जा रही थी। जतिन ने कहा कि ईडी अधिकारी संजीत कुमार साहू पापा से पूछ रहे थे कि राहुल गांधी से तुम मिलते हो, उनके पास कितनी संपत्ति है? पापा ने कहा कि मैं राहुल गांधी से नहीं मिलता हूं, बच्चे मिलते हैं। बेटी बोली- ईडी की वजह से प्रेशर में थे हमने जब जतिन से पूछा कि ये सब तो सीसीटीवी में रिकॉर्ड होगा? तो जतिन ने बताया कि सीसीटीवी की केबल ईडी ने उखाड़ दी थी। 13 दिसंबर जिस दिन मनोज और नेहा फांसी के फंदे पर लटके मिले, उस दिन को याद करके उनकी बेटी जिया कहती है कि हम सुबह उठे तो भैया पापा–मम्मी को ढूंढने जा चुके थे। वह कहती है कि पापा–मम्मी हमेशा हमें मोटिवेट करते रहते थे। हम न्यूजपेपर पढ़ते थे, तो कई बार सुसाइड की खबरें होती थीं। वो कहते थे कि कभी अपने आपको नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। आखिरी दम तक लड़ना चाहिए। हमने पूछा क्या वजह रही होगी तो बोलीं कि मैंने सुसाइड नोट पढ़ा नहीं है लेकिन मुझे बताया कि वह ईडी से काफी दबाव में थे। मनोज की पत्नी नेहा परमार ने सुसाइड क्यों किया? नेहा के नाम जिया इंडस्ट्रीज थी, जिसमें लोन का पैसा ट्रांसफर हुआ था। लेकिन सीबीआई ने अब तक इस मामले में पत्नी नेहा को आरोपी नहीं बनाया है। जांच एजेंसियों के लिए भी ये सवाल है कि नेहा ने सुसाइड क्यों किया। परिजनों का तर्क है कि मनोज ने अपने इरादे बताए होंगे तो पत्नी ने कहा होगा कि वो भी साथ ही खुदकुशी करेगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि दोनों ने सुसाइड किया है। कथित सुसाइड नोट में प्रॉपर्टी कारोबारी संचेती पर छापामार कार्रवाई के आरोप
परमार की लाश के पास मिले नोट के पीछे एक पर्ची मिली थी। जिसमें लिखा था। 25 अक्टूबर को केस हारने के बाद पुनीत संचेती अलग–अलग लोगों से मुझे बुलवा रहा था कि मैं मनोज की व्यवस्था ऐसी जगह करके आया हूं कि इस बार नहीं बचेगा। पुनीत ने बीजेपी के किसी नेता को पैसे देकर रेड करवाई थी, जिससे यह सब राजनीतिक लगे। रेड वाले दिन ईडी अधिकारी साहू बोल रहे थे कि पुनीत संचेती से मिल लेना, इसलिए मुझे लगा कि पुनीत ने बीजेपी नेताओं से मिलकर रेड करवाई थी। इस बारे में जब परमार के बच्चों से पूछा तो उन्होंने कहा -हां, ये पर्ची 6 पन्नों के नोट के साथ पीछे स्टेपल थी। लेकिन ये हाथ से लिखा गया है, जबकि 6 पन्नों का नोट टाइप किया हुआ है। संचेती ने कहा- मनोज ने सौदा रद्द किया, 52 लाख नहीं लौटाए
भास्कर रिपोर्टर ने पुनीत संचेती से संपर्क किया। पुनीत ने बताया कि 2021 में उसने मनोज परमार से 4888 स्क्वायर फीट की एक प्रॉपर्टी का 1.02 करोड़ में सौदा किया था। उसे 52 लाख रुपए दिए थे। लेकिन इस प्रॉपर्टी पर बिल्डिंग बनी है। पुनीत कहते हैं कि एग्रीमेंट ये हुआ था कि मनोज उस प्रॉपर्टी का डायवर्जन, नामांतरण और बिल्डिंग परमिशन लेकर देंगे, इसके बाद रजिस्ट्री होगी। वे कहते हैं कि मनोज अपने वादे से मुकर गया। हमने कोर्ट में केस दायर किया, लेकिन यहां अक्टूबर 2024 में मनोज के पक्ष में फैसला आया। हमने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। भास्कर ने वो प्रॉपर्टी भी देखी, जिसका संचेती और मनोज का का कोर्ट में केस चल रहा है। इसके शटर में मनोज ने महीने भर पहले लिखा रखा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। इस प्रॉपर्टी का भूमि स्वामी मनोज परमार है। 3 पॉइंट्स में जानिए केस से जुड़े अहम सवालों के जवाब 1. ईडी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकेगी: इस पूरे मामले में ईडी 23 दिसंबर तक चार्जशीट दाखिल करने वाली थी, लेकिन अब परमार की मौत के बाद ये नहीं होगा। नियमों के तहत मृत व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट नहीं हो सकती। 2. क्या लेटर सुसाइड नोट माना जाएगा?: पुलिस ने जो कथित सुसाइड नोट बरामद किया है वो एक अर्जी के रूप में है। परिवार के सदस्य शोक में हैं, इसलिए पुलिस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं। अधिकारियों की दलील है कि चूंकि ये नोट उसी कमरे से बरामद हुआ जहां से लाश मिली है, तो ये सुसाइड नोट माना जाएगा। 3. क्या ईडी अफसरों से पूछताछ होगी?: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानूनी तौर पर हर उस व्यक्ति के बयान दर्ज होंगे, जिनका नाम लेटर में लिखा है। ऐसे में इस बात की संभावना है कि ईडी के अधिकारियों के बयान भी दर्ज हो। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… आष्टा कारोबारी सुसाइड केस- बेटे ने कहा, खून में कांग्रेस:राहुल गांधी हमारे साथ हैं; बेटी बोली- पापा ने मौत से पहले ‘दो पल खुशी’ गाना गाया मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा में 13 दिसंबर को कारोबारी मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा का शव घर में फंदे से लटकता हुआ मिला था। परिवार का आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अफसर मनोज को प्रताड़ित कर रहे थे। वे उन्हें कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन करने और राहुल गांधी के खिलाफ वीडियो बनाने का दबाव बना रहे थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें..

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *