भाजपा के मप्र अध्यक्ष और खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति (2020) ने भारतीय शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि यह नीति ज्ञान आधारित, सर्वसुलभ और सर्वसमावेशी शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति को बढ़ावा देती है। शर्मा मंगलवार को दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। शर्मा कहा कि नई शिक्षा नीति लागू करने की प्रक्रिया 2015 से शुरू हुई थी। इसके लिए देश के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और आम जनता से सुझाव लिए गए। इस नीति से शिक्षा का भारतीयकरण हुआ है, जबकि कांग्रेस के समय की शिक्षा नीतियों में तुष्टीकरण और वामपंथीकरण का प्रभाव था। नई शिक्षा नीति गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति और बेटियों के लिए वरदान साबित हुई है। इसमें मल्टीपल एंट्री-एग्जिट विकल्प भी शामिल है। 8 साल में 7109 उच्च शिक्षण संस्थान बढ़े : वर्ष 2014-15 में देश में 51,534 उच्च शिक्षण संस्थान थे, जो 2022-23 में बढ़कर 58,643 हो गए। विश्वविद्यालयोकी संख्या 760 से बढ़कर 1,213 हुई। महिला नामांकन में 38.4% की वृद्धि हुई और छात्रों का कुल नामांकन 4.46 करोड़ पहुंच गया। शिक्षा में नई ऊंचाई
{उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में 13.8% वृद्धि {महिला फैकल्टी सदस्यों की संख्या 29.1% बढ़ी {शिक्षा के लिए बजट 78% बढ़कर 42,300करोड़ रुपए हुआ।


