बिना अनुमति पोस्टर लगाने पर 5 हजार रु. की पेनल्टी:एमपी विधानसभा में जनविश्वास बिल पेश, 6 विभागों के कानून बदलेंगे

आपकी प्राइवेट प्रॉपर्टी पर किसी ने बिना अनुमति के पोस्टर चिपका दिया है, तो उसे अब 500 रु. जुर्माना भरने के बजाय 5 हजार रु. पेनल्टी लगेगी। इसी तरह किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के भाड़े में की गई बढ़ोत्तरी की जानकारी नहीं देने पर 200 रुपए की पेनल्टी लगेगी। दरअसल, मप्र सरकार जनविश्वास कानून ला रही है। इसे विधेयक के रूप में मंगलवार को विधानसभा में पेश कर दिया है। दैनिक भास्कर ने पहले ही बता दिया था कि सरकार विधानसभा के इस सत्र में ये विधेयक ला सकती है। इस विधेयक के जरिए उद्योग, श्रम, ऊर्जा, सहकारिता, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगरीय विकास एवं आवास विभाग समेत 6 विभागों के कानूनों की कई धाराओं में संशोधन किया गया है। मौजूदा समय में इन धाराओं के उल्लंघन पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना भी कोर्ट जाकर भरना पड़ता है। नए कानून में कई धाराओं में सजा का प्रावधान हटाया गया है। अब इन कानूनों का उल्लंघन करने पर संबंधित विभाग के कार्यपालन अधिकारी पेनल्टी लगाएंगे। बिल पर 19–20 दिसंबर को चर्चा के बाद विधानसभा से पारित होगा। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस बिल को 1 जनवरी 2025 से लागू कर दिया जाए। आम लोगों को इससे क्या सहूलियत मिलेगी? पढ़िए ये रिपोर्ट नए बिल में फाइन की जगह पेनल्टी जनविश्वास बिल का मुख्य उद्देश्य उद्योग और बिजनेस सिस्टम में सहजता लाना यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना है। व्यापार के लिए कई विभागों से लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है। कानून के नियमों का पालन करना पड़ता है। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान है। अब इसमें बदलाव होगा। उद्योग विभाग के अलावा श्रम, ऊर्जा, सहकारिता, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगरीय विकास एवं आवास विभाग के कानूनी प्रावधान बदले गए हैं। इनमें जहां सजा और जुर्माने का प्रावधान है, उसे हटा दिया गया है। जुर्माने की जगह पेनल्टी का प्रावधान किया गया है। उदाहरण के तौर शहरी क्षेत्र में किसी भी निजी संपत्ति के मालिक की इजाजत के बिना पर पोस्टर लगाने पर 500 रुपए की का जुर्माना लगता है। यदि कोर्ट जाकर जुर्माना नहीं भरा तो हर दिन 50 रुपए की पेनल्टी का प्रावधान है। नए कानून में जुर्माने के स्थान पर 5 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई जाएगी। जबकि दूसरी बार या इससे अधिक उल्लंघन करने पर हर दिन 100 रुपए पेनल्टी लगेगी। बिजली का रिकॉर्ड नहीं रखा तो सिर्फ लगेगी पेनल्टी जो कैप्टिव पावर प्लांट(सीपीपी) का इस्तेमाल करते हैं उन्हें प्लांट से पैदा होने वाली बिजली का पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी है। रिकॉर्ड मेंटेन न करने पर 2 हजार से लेकर 5 हजार रु. तक जुर्माने का प्रावधान है। जिसे कोर्ट में भरना पड़ता है। नए प्रावधान में 5 हजार रु. की पेनल्टी लगेगी। मप्र सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 में संशोधन इस कानून की दो धाराओं में बदलाव किया गया है। गृह निर्माण सोसाइटी का संचालक मंडल या उसका कोई पदाधिकारी अथवा सदस्य गलत जानकारी देने या छिपाने का दोषी पाया जाता है तो 50 हजार रुपए से अधिक की पेनल्टी नहीं लगेगी। इसी तरह सोसाइटी के रिकॉर्ड की जानकारी न देने पर 25 हजार से अधिक की पेनल्टी नहीं लगेगी। अभी तक यह जुर्माना कोर्ट में जमा करना पड़ता था। अब पढ़िए, आम जनता से जुड़े नए प्रावधान नगरीय विकास एवं आवास विभाग के दोनों एक्ट, नगर पालिका अधिनियम 1961 और नगरपालिका निगम अधिनियम 1956 की 40 धाराओं के प्रावधान को बदला जा रहा है। इन धाराओं में फाइन की जगह पेनल्टी शब्द जोड़ा जा रहा है। एक्सपर्ट बोले- जनता को सुविधा मिलेगी नगरीय विकास विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर केके श्रीवास्तव कहते हैं कि इस नए कानून से दो फायदे नजर आ रहे हैं। सरकार कोशिश कर रही है कि जनता का विश्वास सरकारी सिस्टम के प्रति बढ़ सके। अभी कई कानून में जेल और अर्थदंड का प्रावधान है। उदाहरण बताते हुए वे कहते हैं कि सार्वजनिक स्थान पर कचरा फैलाने पर 500 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। इसी तरह नगर निगम और नगर पालिका के बाकी नियमों का पालन कराने के लिए म्यूनिसिपल मजिस्ट्रेट को तैनात किया जाता है। वह मोबाइल कोर्ट के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में निगम अमले के साथ फाइन लगाने और वसूल करने का अधिकार रखते हैं। यदि कोई फाइन जमा नहीं करता है तो उसे जेल भेजा जाता है। नए नियम में जेल नहीं होगी। पेनल्टी लगेगी। इससे अदालतों पर आने वाला बोझ भी कम हो केंद्र सरकार 2023 में लागू कर चुकी है जनविश्वास कानून संसद में जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक 2022 पारित हो चुका है। इसमें 19 मंत्रालयों से संबंधित 42 कानूनों के 183 प्रावधान बदले गए हैं। जन विश्वास विधेयक की समीक्षा करने वाली संयुक्त संसदीय समिति ने इस प्रक्रिया को अन्य अधिनियमों तक विस्तारित करने की सिफारिश की है। केंद्र के इस कानून में मामूली तकनीकी और प्रक्रियागत चूकों के लिए दीवानी दंड और प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, जिससे आपराधिक दंड का भय कम होगा और देश में व्यापार करने और रहने में आसानी होगी। ये खबर भी पढ़ें… अवैध नल कनेक्शन पर 5 हजार की पेनल्टी:एमपी सरकार ला रही जनविश्वास बिल; कोर्ट जाकर जुर्माना भरने की जरूरत नहीं, नियमों में होगा बदलाव केंद्र सरकार की तरह मध्य प्रदेश सरकार भी अब जनविश्वास कानून बनाने जा रही है। इसमें उद्योग, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय विकास एवं आवास विभाग के कानूनों की धाराओं में संशोधन किया जाएगा। मौजूदा समय में इन धाराओं के उल्लंघन पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना भी कोर्ट जाकर भरना पड़ता है। पढ़िए पूरी खबर..

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