‘यह सुनना अच्छा नहीं लगता कि हमारा समाज पुरुष प्रधान’:वसुंधरा राजे ने कहा- महिला प्रधान समाज क्यों नहीं, इसलिए भामाशाह नारी सशक्तिकरण योजना शुरू की थी

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा है कि मुझे यह सुनना कभी भी अच्छा नहीं लगा कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है। पुरुष को जन्म देने वाली तो नारी ही है। मेरे मन में सदा एक ही सवाल तैरता है कि पुरुष प्रधान समाज ही क्यों? महिला प्रधान समाज क्यों नहीं? इसीलिए मैंने 2008 में भामाशाह नारी सशक्तिकरण योजना शुरू कर महिलाओं को परिवार का मुखिया बनाया। ताकि हमारा समाज पुरुष प्रधान नहीं महिला प्रधान बन सके। वसुंधरा राजे शुक्रवार को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित कॉन्फिडरेशन ऑफ विमेन इंटरप्रेन्योर्स ऑफ इंडिया (COWE) के राजस्थान चैप्टर की ओर से दो दिवसीय ‘विमेंस इंटरनेशनल समिट ऑन एंटरप्रेन्योरशिप (वाईज) 2026’ में बोल रही थीं।
वसुंधरा राजे ने कहा- महिलाओं को पुरुषों के बराबर खड़ा करने के लिए ही पंचायत राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। उस समय लोग इसके खिलाफ थे। अलग नजर से देखते थे। बोलते थे कि यह कैसे करेंगी, ये तो घूंघट में हैं। साइन नहीं कर सकती। आप उसके पांच साल बाद का नजारा देखिए, वे महिलाएं अच्छे से हस्ताक्षर कर रही थीं। पुरुष चाय बना रहे थे। उन्होंने कहा कि जो भी महिलाएं आज बेहतर मुकाम तक पहुंची है, वे जानती है कि उस मंजिल को पाने के लिए उन्हें कितना परिश्रम करना पड़ा। कितना धैर्य रखना पड़ा। महिलाओं को उन्नति की ऊंचाइयां पाने के लिए 3 गुना समय देना पड़ता है। पुरुषों के मुकाबले 3 गुना मेहनत करनी पड़ती है। तब जाकर महिलाओं को सफलता मिलती है।
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा- लखपति दीदी सिर्फ योजनाओं की ही सहभागी नहीं है। वे देश के लिए परिवर्तनकारी भी है। लखपति दीदी ने यह कर दिखाया है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की नींव बन सकते हैं। महिलाएं ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। महिलाएं डिजिटल और AI के क्षेत्र में भी भविष्य की अर्थव्यवस्था गढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लखपति दीदी, दीनदयाल अंत्योदय, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, स्टैंड अप इंडिया और प्रधानमंत्री मुद्रा जैसी योजनाएं महिलाओं को उद्यमिता और वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ‘COWE एक्सीलेंस अवॉर्ड्स’ समारोह में महिला उद्यमियों को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। COWE राजस्थान की फाउंडर प्रेसिडेंट निधि तोशनीवाल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना, प्रेरित करना और उनके उद्यमिता सफर में सार्थक नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करना है। इन दो दिनों के दौरान उद्यमियों, स्टार्ट-अप ईकोसिस्टम पार्टनर्स और उभरती महिला उद्यमियों को पैनल स्पीकर्स और इंडस्ट्री के लीडर्स से सीधा संवाद करने और नेटवर्क स्थापित करने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में पूरे भारत से महिला एंटरप्रेन्योर, COWE नेशनल कमिटी और चैप्टर कमिटी के सदस्य शामिल हुईं। समिट के पहले दिन उद्घाटन सत्र आयोजित हुआ, जिसके बाद सेशंस की शुरुआत हुई। पहले दिन के सेशंस ‘अनलॉकिंग कैपिटल-फाइनेंसिंग स्कैलेबल एंड इम्पैक्ट-ड्रिवन एंटरप्राइजेज’; ‘एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन- क्राफ्टिंग फ्यूचर -रेडी बिजनेस’; और ‘लीडिंग विद इम्पैक्ट- बिल्डिंग रेजिलिएंट ऑर्गेनाइजेशन’ विषय पर आयोजित हुए। उल्लेखनीय है कि COWE इंडिया एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में हैदराबाद में की गई थी। यह एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (ईडीपी), टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, एडवोकेसी, मेंटरिंग और इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना जैसी पहलों के माध्यम से उद्यमशील वातावरण को प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, यह संगठन पिछले दो दशकों से बैंकों और एंजेल निवेशकों के साथ वित्तीय संपर्क स्थापित कराने में सहायता करने और विभिन्न सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाता आ रहा है।

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