प्रताड़ित दिव्यांग छात्र का स्कूल छूटा, 9 माह बाद भी न्याय नहीं, अब कोर्ट से आस केंद्र सरकार के एक बोर्डिंग स्कूल में कक्षा 9वीं का दिव्यांग दलित छात्र 9 माह पहले स्कूल स्टाफ की प्रताड़ना का शिकार हो चुका है, लेकिन उसको न्याय अब तक नहीं मिला है। जिस कारण छात्र ने स्कूल जाना भी बंद कर दिया है। छात्र के माता-पिता का सपना बच्चे को पढ़ा लिखाकर काबिल इंसान बनाने का है, लेकिन उनके सपनों पर ग्रहण 1 अप्रैल को उस वक्त लगा जब छात्र स्कूल में बीमार हुआ। स्कूल में उसे न तो बेहतर इलाज मिला। साथ ही परिजन को सूचना 16 अप्रैल को दी। इसी दौरान बच्चे को डराया और धमकाया भी। परिजन बच्चे का उपचार निजी हॉस्पिटल में करा रहे हैं। परिजन ने घटना की शिकायत 4 मई को की। कलेक्टर ने 5 सदस्यीय टीम बनाकर जांच कराई। एसडीएम जांच में स्टाफ नर्स प्रीति कोचे, काउंसलर शिवानी श्रीवास्तव व ग्रंथपाल मोहनलाल कोरी दोषी निकले। स्टाफ नर्स, ग्रंथपाल को अनूपपुर में अटैच कर दिया, लेकिन काउंसलर पर कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए परिजन अब कोर्ट की शरण में हैं। रिपोर्ट में खामियां का जिक्र कान पकड़ पीटते थे टीचर, फेल की देते धमकी, तंग आकर बच्चे ने पिया फिनाइल डेढ़ माह पहले पिया था फिनाइल, थाने में दर्ज हुई एफआईआर होमवर्क और अटेंडेंस समेत अन्य शिकायतों को लेकर टीचर स्कूल में कहीं भी कान पकड़कर पीटना शुरू कर देते थे। एक अन्य महिला शिक्षिका बार-बार बच्चे को बदतमीज बताकर उसे फेल करने की धमकी देती थी। इस प्रताड़ना से तंग आकर महाराजपुरा स्थित शासकीय स्कूल के कक्षा 9वीं के छात्र ने फिनाइल पीकर जान देने की कोशिश की। समय पर उपचार मिलने से बच्चे की जान बच गई। इसके बाद बच्चे ने लंबे समय से खुद को शिक्षकों द्वारा सताए जाने का आरोप लगाया है। 8 नवंबर को छात्र ने फिनाइल पिया था। 16 दिसंबर को इस मामले में शिक्षक दिवाकर शर्मा और रश्मि गुप्ता पर प्रताड़ित करने की एफआईआर दर्ज की गई है। डीडी नगर निवासी छात्र की मां ने बताया कि इलाज के बाद एक सप्ताह पहले बच्चे ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है। हिंदी पढ़ाने वाली आरोपी शिक्षिका रश्मि गुप्ता सस्पेंड हो गई हैं। वहीं दिवाकर शर्मा अभी भी स्कूल में संस्कृत पढ़ाते हैं। संस्कृत के टीचर दिवाकर शर्मा बच्चे काे कभी खेल मैदान में और कभी हॉल में कान पकड़कर पीटते थे। वहीं हिंदी की टीचर रश्मि गुप्ता बार बार बच्चे को क्लास में खड़ा कर देती थीं। बोलती थीं कि तुम बहुत बदतमीज हो, इसलिए मैं तुम्हें फेल कर दूंगी। डरे, सहमे और परेशान छात्र ने फिनाइल पी लिया। तुरंत इलाज मिल जाने के कारण उसकी जान बच गई।


