ठंडी सुबह, हल्की धूप और सूरज मैदान में उमड़ा हौसले से भरा हुजूम। कुछ अपने दर्द से आजाद होकर नई जिंदगी की ओर बढ़ रहे थे, तो कुछ उन्हें देखकर अपने डर को पीछे छोड़ने का हौसला बटोर रहे थे। सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. धीरेज दुबे की पहल पर आयोजित गोल्डन वॉरियर्स वॉक में वे सभी लोग शामिल हुए, जिन्होंने जोड़ प्रत्यारोपण के बाद नई ऊर्जा पाई है। इस वॉक को मिर्जापुर वेब सीरीज फेम अभिनेता शाजी चौधरी ने फ्लैग ऑफ रवाना किया। राजापार्क स्थित सूरज मैदान में आयोजित इस वॉक में सभी प्रतिभागियों का जोश देखते ही बन रहा था। वॉक से पहले जुम्बा और जोश से भरी शुरुआत
इस वॉक में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कराए लोगों ने वॉक कर उन लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जो जोड़ों की तकलीफ तो झेल रहे थे लेकिन सर्जरी कराने से डर रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत जुंबा डांस और स्ट्रेचिंग से हुई, जिससे प्रतिभागियों में जोश भर गया। सभी ने बॉलीवुड के गानों पर जमकर डांस किया। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, जो पहले चलने में असमर्थ थे, अब आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाते दिखे। इस दौरान लोगों ने डॉ. धीरज दुबे के साथ अपने अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को मेडल भी मिला। स्वास्थ्य के बिना कुछ नहीं, इसे सहेज कर रखे: शाजी चौधरी इस मौके पर मुख्य अतिथि शाजी चौधरी ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है। इसे सहेज कर रखें क्योंकि इसके साथ ही आप अपने जीवन का एक-एक पल आनंद ले सकेंगे। उन्होंने गोल्डन वॉरियर्स वॉक पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब युवा अपने बड़ों को अपनी हेल्थ के लिए इतना जागरूक देखेंगे तो वे भी अभी से इसके लिए गंभीर हो जाएंगे। इस दौरान डॉ. धीरेज दुबे ने जोड़ प्रत्यारोपण को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने बताया कि यह सर्जरी केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि किसी भी उम्र के जरूरतमंद व्यक्ति के लिए हो सकती है। प्रत्यारोपण के बाद जीवनभर सावधानी बरतने की जरूरत नहीं होती, बल्कि सही देखभाल और व्यायाम से व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। कई लोग मानते हैं कि सर्जरी के बाद घुटने कमजोर हो जाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि आधुनिक तकनीकों से बनाए गए प्रत्यारोपण लंबे समय तक चलते हैं और व्यक्ति को मजबूती व गतिशीलता प्रदान करते हैं। यह भी गलतफहमी है कि ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ता है, जबकि अधिकतर मरीज 24 घंटे के भीतर चलने लगते हैं और कुछ हफ्तों में सामान्य जीवन जीने लगते हैं।


